दमोह। दमोह में 30 हजार रुपए की मासिक आय वाले शिक्षक के 7 साल से बीपीएल कार्ड का लाभ लेने का मामला सामने आया है। ख़ास बात यह है कि शिक्षक की पत्नी भी आंगनबाड़ी सहायिका है। हाल ही में खाद्यान्न पर्ची के सर्वे के दौरान मामले का खुलासा हुआ। मामला सामने आने के बाद अधिकारी भी हैरान है और कार्रवाई की बात कर रहे हैं।
दरअसल सरकार द्वारा बीपीएल कार्ड धारकों को दो रुपए किलो में अनाज उपलब्ध कराया जाता है। यह योजना गरीब परिवारों के लिए होती है, लेकिन कई बार सम्पन्न लोग भी अधिकारियों से मिलीभगत करके बीपीएल कार्ड बनवा लेते है। और सस्ते अनाज सहित अन्य सुविधा लेते हैं। दमोह जिले के पटेरा विकासखंड के शासकीय स्कूल में पढ़ाने वाले गजराज रैकवार कागजों में बीपीएल कार्ड धारक है। जबकि उनकी मासिक आय 30 हजार रुपए महिना है और उनकी पत्नी नंदा रैकवार भी आंगनबाड़ी सहायिका है।
शिक्षक और उनकी पत्नी पिछले सात सालों से बीपीएल कार्ड का लाभ ले रहे हैं। शिक्षक ने साल 2013 में अपना बीपीएल कार्ड बनवाया था। ऐसे में तत्कालीन पटवारी पर भी सवाल उठ रहे हैं क्यों कि पटवारी से सांठगांठ के बिना बीपीएल कार्ड नहीं बन सकता।
पिछले दिनों जब पंचायत सचिव खाद्यान्न पर्ची के सर्वे के दौरान उनके घर पहुंचे तो पता चला कि गजराज रैकवार पेशे से शिक्षक है और उनकी मासिक आय 30 हजार रुपए महीना है। तब जाकर पूरे मामले का खुलासा हुआ। वहीँ मामले में कलेक्टर का कहना है कि जल्द ही कार्ड निरस्त कर मामले की जांच की जाएगी।
