देवास। सब्जी उत्पादक किसानों को लॉकडाउन के कारण बड़ा नुकसान हुआ हैं। ऐसे में देवास जिले के बागली क्षेत्र के किसानों ने नफा-नुकसान भूलकर अपनी सब्जियां लागत मूल्य पर देने का फैसला लिया हैं। हालांकि इसके लिए भी किसान सरकार पर निर्भर हैं। अगर सरकार किसानों का सहयोग करती हैं तो ठीक वरना कोरोना संकट का तो पता नहीं लेकर कर्ज का बोझ कई पीढ़ियों को विरासत में जरूर मिलेगा।
बता दे कि किसी समय देवास जिले के बागली अनुभाग का घाटनीचे क्षेत्र की पहचान सागवान के घने जंगलों से होती थी। मालवा का अंतिम छोर व निमाड़ के प्रारंभ होने से गर्म हवाओं के साथ धूल-मिट्टी के बवंडर उड़ते दिखते थे। हालांकि नर्मदा नदी पर ओंकारेश्वर डैम बनने के बाद से क्षेत्र को नई पहचान मिली। सूखे वीरान गांव हरियाली से सराबोर हो गए। बड़ी संख्या में ग्रामीण सब्जियों का उत्पादन करने लगे। क्षेत्र के पुंजापुरा, भीकुपुरा, सोबलियापुरा, किशनगढ़, पानकुआ, रातातलाई, नीमखेड़ा, पंजरिया सहित दो दर्जन से अधिक गांव में सब्जियों का भरपूर उत्पादन होता है। टमाटर, हरी मिर्च, भिंडी, गाजर, गिलकी, करेला, ककड़ी सहित कई तरह की सब्जियां 30 से अधिक गांवों का सफर तय करके इंदौर व भोपाल जैसे महानगरों के रहवासियों की थालियों तक पहुंचती है।
इस बार प्रकृति की मेहरबानी के कारण सब्जियों का बम्पर उत्पादन हुआ है। ऐसे में किसानों को अच्छा मुनाफा होने की उम्मीद थी। लेकिन लॉकडाउन ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। लॉकडाउन की ऐसी मार पड़ी की किसान अब लाभ की उम्मीद छोड़ लागत पर सब्जियां बेचने के लिए तैयार हैं।
क्षेत्र के किसान भगवान सिंह पटेल ने बताया कि सब्जियां उत्पादन में प्रति हेक्टर 1 लाख रुपये खर्च होता है। क्षेत्र में लगभग 300 हेक्टर सब्जियां किसानों ने लगाई है। यहां से इंदौर और भोपाल सहित अन्य राज्यों में प्रतिदिन 10 से अधिक ट्रकों से ढाई सौ से तीन सौ क्विंटल सब्जियां मंडियों तक प्रतिदिन पहुँचती है। लेकिन लॉकडाउन के कारण इंदौर और भोपाल कोरोना संक्रमण हॉटस्पॉट बनने से मंडिया पूरी तरह बंद है। कुछ दिनों पहले गांव से परिवहन की अनुमति के बाद चार गाड़ियां भोपाल गई थी लेकिन व्यापारियों के अभाव में सब्जियों से भरी गाड़ियां वापस आ गई, जिसका भाड़े का अतिरिक्त भार किसानों पर पड़ा।
सब्जियों को ज्यादा दिनों तक स्टोर करके नहीं रखा जा सकता। ऐसे में लॉकडाउन बढ़ने के साथ ही क्षेत्र के 40 प्रतिशत किसानों ने सब्जियां खेतों से उखाड़ दी है ताकि कृषि भूमि में डाले खाद का उपयोग दूसरी फसल बो कर मुनाफा प्राप्त कर सके। वहीँ कुछ किसान ऐसे भी हैं जो इस आपदा में मदद के हाथ आगे बढ़ाते हुए मात्र लागत मूल्य पर अपनी सब्जियां घरों तक पहुँचाना चाहते हैं।
भारत सरकार ने भी किसानों की परेशानी को देखते हुए चार-पांच दिन पहले सब्जियों को खरीदने के लिए पोर्टल खोला है। इसमें स्पेशल ट्रेन द्वारा सब्जियों को क्रय करके ट्रेन से अलग अलग स्थानों पर लाने ले जाने की व्यवस्था होगी। हालांकि अभी इसकी पूरी जानकारी किसानों के पास नहीं पहुंची है। किसान लागत मूल्य पर अपनी सब्जियां बेचने को तैयार भी है, लेकिन जानकारी के अभाव में किसान परेशान है। वही भारत सरकार द्वारा इस संबंध में एक हेल्पलाइन नम्बर 183 भी जारी किया है जो भी बंद है।
