सतना। मध्यप्रदेश के सतना में रहने वाली एक महिला मजदूर ने गर्भावस्था के नौवें महीने लगभग 70 का पैदल सफ़र तय किया। रास्ते में प्रसव पीड़ा हुई तो साथी महिलाओं की मदद से सड़क किनारे बच्ची को जन्म दिया। महिला की परेशानी यहीं खत्म नहीं हुई। बच्ची के जन्म के दो से तीन घंटे बाद ही महिला ने नवजात को गोद में लेकर चलना शुरू किया। लगभग 150 किलोमीटर पैदल चलने के बाद महिला को मदद मिली। तब जाकर महिला अपने घर सतना आ सकी।
लॉकडाउन के कारण रोजी रोटी के लिये प्रदेश के बाहर गए मजदूर अब वापस अपने घर लौटने लगे हैं। ऐसे में घर वापस आने में मजदूरों को आ रही परेशानियों की विचलित कर देने वाली कहानियां सामने आ रही है। ऐसी ही एक विचलित कर देने वाली कहानी मध्यप्रदेश के सतना जिले में रहने वाली महिला मजदूर शकुंतला की है। शकुंतला की इस कहानी ने मजदूरों के घर जाने की व्यवस्था करने के सरकारी दावों की पोल खोल दी है।
सतना जिले के उचेहरा तहसील के खोखर्रा वेलहाई में रहने वाली शकुंतला रोजी-रोटी के लिए नासिक गई हुई थी। लॉकडाउन के कारण काम बंद हुआ तो गर्भावस्था के नौवें महीने में भी नासिक से घर के लिए निकल पड़ी। लगभग 70 किलोमीटर पैदल चलने के बाद मुंबई-आगरा हाईवे पर स्थित पिंपलगांव के आसपास महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। इस पर साथी महिलाओं की मदद से शकुंतला ने बच्ची को जन्म दिया। बच्ची के जन्म के 2-3 घंटे सड़क किनारे ही शकुंतला रुकी रही और फिर पुनः पैदल चलने लगी।
शकुंतला जब बिजासन बॉर्डर पर पहुंची थी उसके गोद में नवजात बच्चे को देख चेक-पोस्ट की इंचार्ज कविता कनेश उसके पास जांच के लिए पहुंची। नवजात बच्ची देख कविता को लगा कि शकुंतला को मदद की जरुरत है। जब शकुंतला ने पुलिसकर्मियों को अपनी कहानी सुनाई तो पुलिस टीम अवाक रह गई। इसके बाद अधिकारियों ने शकुंतला को उसके घर तक भेजने के प्रबंध किया।
अपने गाँव पहुँचने के बाद शकुंतला ने मीडिया से अपना दर्द बयां किया। सकुंतला ने कहा कि नासिक से बिजासन बार्डर तक किसी भी तरह से प्रशासनिक मदद हमे नही मिली। जैसे ही हम मध्यप्रदेश के बॉर्डर पहुँचे तो अधिकारियों ने हमारी मदद की और आज हम यहाँ पहुँच पाये है।
वही शकुंतला के पति राकेश कोल ने बताया कि यात्रा बेहद कठिन था, लेकिन रास्ते में मददगार भी मिले। एक सरदार परिवार ने नवजात बच्चे के लिए कपड़े और आवश्यक सामान दिए। राकेश ने बताया कि लॉकडाउन की वजह से नासिक में उद्योग धंधे बंद हैं, इस वजह से नौकरी चली गई। वाहन बंद होने से गांव तक पहुंचने के लिए पैदल जाने के सिवा हमारे पास कोई और चारा नहीं था। हमारे पास खाने के लिए भी कुछ नहीं बचा था। ऐसे में घर लौटना ही एक मात्र चारा बचा था। अंतिम विकल्प देख सभी पैदल चल दिये। जैसे ही पिंपलगांव पहुंचे, वहां पत्नी को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई।
बता दे कि शकुंतला के पांच बच्चे है, नवजात बच्ची पूरी तरह से स्वस्थ है। उचेहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद में उसका मेडिकल चेकअप हुआ है। डॉक्टर की माने तो जच्चा-बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ है और जिला प्रशासन को सूचना दी गई है। Covid 19 को लेकर जो भी दिशा निर्देश मिलेंगे उस पर अमल किया जायेगा।
देश मे लॉकडाउन के बीच एक तरफ सरकारी सिस्टम की पोल खुलती दिखाई पड़ रही है तो वहीँ देश को एक ऐसी सशक्त माँ देखते को मिल गई जिसने गर्भावस्था मे 70 किलोमीटर पैदल चल बच्ची को जन्म दिया और महज 2-3 घंटे रुकने के बाद फिर से 150 किलोमीटर पैदल चलकर अपनी नवजात बच्ची के साथ गाँव पहुँच गई। एक माँ का यह जज्बा उसके बच्चो प्रदेश और देश के लिए मिसाल बन गया है।
