देवास। देवास जिले के आगुर्ली गाँव के लोगों ने कोरोना संक्रमण के साथ जीना सीख लिया है। लॉकडाउन में इस गाँव में 10 शादियां हुई हैं, लकिन बारात में महज पांच-पांच लोग ही आए और गए। एक बारात में दूल्हे के पिता नहीं आए जबकि एक शादी में दुल्हन की बड़ी बहन ही शादी में शामिल नहीं हुई।
गौरतलब है कि लॉकडाउन का चौथा चरण खत्म होने में महज कुछ ही दिन बचे हैं। बावजूद इसके कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं। ऐसे में कहाँ जा रहा है कि हमें कोरोना संक्रमण के साथ जीना सीखना होगा। साफ़-सफाई और सोशल डिस्टेंसिंग रखकर संक्रमण को फैलने से रोकना होगा। देवास जिले के आगुर्ली गाँव के लोगों ने इस सीख को अपने जीवन में उतार लिया है।
यहीं कारण है कि लॉकडाउन में इस गाँव में 10 शादियां हुई हैं, जिसमें छह लड़कियों की जबकि चार लड़कों की शादी हुई। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का खास ध्यान रखा गया। बारात में महज पांच-पांच लोग ही आए और गए। अगर लॉकडाउन नहीं होता तो इन शादियों में करीब 50 लाख रुपए खर्च होते लेकिन लॉकडाउन में महज 50 हजार रुपए में शादियां हो गई।
गाँव के जितेन्द्र सिंह ने बताया कि उनके छोटे भाई की बेटी की शादी 18 मई को इंदौर के पास बाघमुंडला में रहने वाले हरिसिंह के बेटे से हुई। हमने समधी हरिसिंह के सामने शर्त रखी कि हम अभी शादी के लिए तैयार है लेकिन बारात में सिर्फ उतने ही लोग आएंगे, जितने की प्रशासन अनुमति दे। इस पर उन्होंने भी सहमती जताई। सिर्फ पांच लोग बारात लेकर आए। दूल्हे के पिता हरिसिंह खुद बेटे की शादी में शामिल नहीं हो पाए।
इसी तरह गाँव के एक युवक की शादी शाजापुर जिले में रहने वाली युवती से हुई। गाँव से बारात में महज पांच लोग ही गए। इस तरह गाँव के अन्य लड़कों की शादी में पांच-पांच लोग ही बारात लेकर गए जबकि लड़कियों की शादी में भी पांच-पांच लोग ही बारात लेकर आए।
