इंदौर। इंदौर के चिड़ियाघर में अब पशु-पक्षी सलाखों में नहीं बल्कि प्राकृतिक माहौल में दिखाई देंगे। चिड़ियाघर प्रशासन प्राणियों के बाड़े में तालाब, मचान व टीले बना रहा है। ऐसे में लोग बाघ, पक्षियों सहित अन्य जीवों को जंगल जैसे माहौल में देख पाएंगे।
गौरतलब है कि कोरोना संकट के कारण इंदौर का कमला नेह़रू प्राणी संग्रहालय 18 मार्च से बंद हैं। इस कारण अब तक चिड़ियाघर प्रशासन को 2।5 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका हैं। हालांकि अब जल्द ही चिड़ियाघर को वापस खोला जा सकता है। ऐसे में जब भी चिड़ियाघर खुलेगा लोगों को यहां तीन बड़े बदलाव नजर आएंगे।
प्रशासन चिड़ियाघर में व्हाइट टाइगर के लिए दो छोटे तालाब, दो मचान और दो टीले बना रहा है। 1 करोड़ 72 लाख रुपए में 6350 स्क्वेयर मीटर क्षेत्र में बनाए जा रहे ख़ास बाड़े में लोग बाघों को जंगल जैसे माहौल में नेचरल एक्शन में देख सकेंगे। बता दे कि इंदौर के चिड़ियाघर में अब तक व्हाइट टाइगर नहीं है, लेकिन जल्द ही विशाखापट्टनम व हैदराबाद ज़ू से तीन जोड़े लाए जाएंगे।
इसके अलावा रंग-बिरंगे पक्षियों के लिए चिड़ियाघर प्रशासन एविएरी बना रहा है। इससे आप पक्षियों को पिंजरें में नहीं बल्कि प्राकृतिक वातावरण में देख सकेंगे। इसके लिए पेड़ों के बीच 200 फीट लंबा 100 फीट चौड़ा ट्रेक बनाया जा रहा है। साथ ही वॉटरफॉल भी बनाया जा रहा है।
वहीं चिड़ियाघर में मौजूद 30-35 बंदर-लंगूरों के लिए मंकी मोट बनाया जा रहा है। इसमें बाउंड्री होगी, लेकिन सलाखें नहीं होगी। 92 लाख रुपए से बन रहे इस मोट में 40 फीट गहरी खाई बनाई है जिसमें पानी होगा और बीच में पेड़ होंगे। जिससे लोग बंदर-लंगूरों को पिंजरों में नहीं बल्कि खुले वातावरण में पेड़ों पर उछलकूद करते देख सकेंगे।
