छिंदवाड़ा। अपनी पुरातात्विक धरोहर के लिए प्रसिद्ध छिंदवाड़ा जिले का देवगढ़ को यहां के किसान नई पहचान दे रहे हैं। देवगढ़ के किसान अब परम्परागत खेती छोड़ संतरे की खेती कर रहे हैं। इससे क्षेत्र के किसानों को अतिरिक्त लाभ हो रहा है। साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल रहा है।
अगर सरकारी योजना का सही तरीके से क्रियान्वयन हो तो तरक्की के रास्ते खुलने में देर नहीं लगती। छिंदवाड़ा जिले के देवगढ़ के किसानों ने इसे बिलकुल सच साबित कर दिखाया है। राजाओं के किले और बावड़ियों के लिए देश में प्रसिद्ध देवगढ़ अब संतरे की खेती के लिए अपनी पहचान बना रहा है।
दरअसल किसानों की आय बढ़ाने के लिए देवगढ़ ग्राम पंचायत के 59 किसानों को मनरेगा की नन्दन फलोद्यान उपयोजन के तहत 76.92 लाख रुपए स्वीकृत हुए। इस राशी से किसानों ने अपने खेतों में अच्छी गुणवत्ता वाले संतरे के पौधे रोपे। साथ ही किसानों को संतरे की खेती के लिए प्रशिक्षित भी किया गया। किसानों को पौधारोपण के लिए पौधे और अन्य जरुरी चीजों के साथ-साथ अपने बगीचों को विकसित करने के लिए मजदूरी भी दी गई।
इसके फायदा यह हुआ है कि देवगढ़ ग्राम पंचायत के किसानों ने एक साल में 50 लाख रुपए से अधिक के संतरे बेच दिए। वहीं पौधे अभी बहुत अच्छी स्थिति में है इसलिए आगे भी इनमें फल आते रहेंगे। संतरे की उपज के साथ ही किसान बगीचों में मिर्ची, मुंग सहित अन्य उपज लेकर अतिरिक्त आमदनी भी कमा रहे हैं। संतरों की खेती से हो रही आमदनी को देख क्षेत्र के अन्य किसानों ने भी संतरे के बगीचे लगाने में रुचि दिखाई है।
