विदिशा। मध्यप्रदेश के एक गाँव में पुरुषों की शराब की लत छुड़ाने के लिए बच्चे और महिलाएं उपवास कर रही है। इसका असर यह हुआ है कि आज गाँव के लगभग 95 फीसदी लोग शराब नहीं पीते हैं। साथ ही ग्रामीणों ने गाँव में शराब का सेवन और विक्रय करने वाले व्यक्ति का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।
दरअसल कुछ सालों पहले विदिशा जिले के जाफरखेड़ी गाँव के ज्यादातर पुरुष शराब का सेवन करते थे। 700 लोगों की आबादी वाले इस गाँव में लगभग 300 पुरुष नशे की गिरफ्त के कारण बर्बाद हो रहे थे। रोजाना गाँव के बाहर शराब की दुकानों पर लाइन लगती थी। पुरुषों के शराब में लिप्त रहने के कारण घर में अशांति रहती थी। साथ ही आर्थिक स्थिति भी बिगड़ती जा रही थी।
ऐसे में गाँव के एक शिक्षक विशननारायण भार्गव ने गाँव को शराब मुक्त करने का निश्चय किया। इसके लिए उन्होंने गाँव की महिलाओं और बच्चों को अपने-अपने घर के पुरुषों की नशे की लत छुड़ाने के लिए तैयार किया। भार्गव ने महिलाओं और बच्चों से कहा कि घर के पुरुष सदस्य शराब पीकर घर आए तो उनका विरोध करने की बजाय उपवास करो।
इसके बाद जब भी कोई व्यक्ति शराब पीकर घर आता और पत्नी से पूछता कि बच्चों ने भोजन किया है? तो पत्नी कहती कि आपके शराब पीने की आदत से बच्चे परेशान है और दुखी होकर खाना नहीं खा रहे हैं। जब हर घर में ऐसा माहौल बन गया तो गाँव के पुरुषों से शराब से तौबा कर लिया। इसका असर यह है कि आज गाँव के महज 5 फीसदी पुरुष ही चोरी-छिपे शराब पीते है।
इसके अलावा ग्रामीणों ने आपसी सहमती से शराब का सेवन और विक्रय करने वाले व्यक्ति का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। इसके तहत शराब का सेवन और विक्रय करने पर संबंधित व्यक्ति को गाँव और समाज से बाहर कर क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी।
