May 17, 2026

40 साल बाद मुंह से निकला गाँव का नाम, मिला बिछड़ा परिवार

दमोह। अपने परिवार से बिछड़ी मानसिक रूप से कमजोर महिला की जुबां पर 40 साल बाद आए अपने गाँव के नाम ने उसे अपने परिवार से मिला दिया। जहाँ एक तरफ महिला से मिलकर उनके परिजन खुश हैं। वहीं 40 साल से महिला की देखरेख करने वाले परिवार को महिला से बिछड़ने का दुख तो हैं लेकिन महिला के उसके परिवार से मिलने की ख़ुशी भी है।

दरअसल महाराष्ट्र के नागपुर में रहने वाली पंचूबाई 54 साल की उम्र में अपने परिवार से बिछड़ गई थी। इसके बाद पंचूबाई राज्य परिवहन की बस से नागपुर से मध्यप्रदेश के दमोह पहुंची थीं। यहां से किसी ट्रक चालक ने उन्हें दमोह जिले के कोटातला में छोड़ दिया था। 40 साल पहले कोटातला में रहने वाले नूर खान को वह घायल अवस्था में मिली थी। नूर खान ने महिला का इलाज कराया और उसे अपने घर ले आए। मानसिक रूप से कमजोर होने के कारण पंचूबाई अपना पता नहीं बता पा रही थी। इस पर नूर खान ने पंचूबाई को अपनी बहन मानकर उसे अपने घर का सदस्य बना लिया। नूर के परिवार के लोग उन्हें अच्छन मौसी कहने लगे।

पिछले दिनों 94 साल की पंचूबाई की जुबां पर परसापुर नाम आया। उस समय नूर खान का बेटा इसरार उनके पास था। इसरार को लगा कि अच्छन मौसी किसी गाँव का नाम ले रही है। ऐसे में उसने जब गूगल पर परसापुर सर्च किया तो कियोस्क संचालक के अभिषेक का नाम और नंबर सामने आया। इस पर इसरार ने अभिषेक को पूरी बात बताई।

इसके बाद अभिषेक ने इसरार से पंचूबाई का वीडियो मंगवाया और अपने इलाके में सोशल मीडिया पर फैला दिया। जून के पहले सप्ताह में इसरार के पास पृथ्वी शिंगणे ने फ़ोन किया और बताया कि वीडियो में नजर आ रही महिला उसकी दादी है और उनका नाम पंचूबाई है। पृथ्वी ने इसरार को बताया 40 साल पहले उनके पिता अपनी मां पंचूबाई का इलाज कराने के लिए उन्हें नागपुर लेकर आए थे। इस दौरान पंचूबाई अपने बेटे से बिछड़ गई थी।

इसरार के अनुसार उनके पिता नूर खान को बस स्टैंड के पास पंचूबाई मधुमक्खियों के हमले में बुरी तरह घायल अवस्था में मिलीं थीं। वह उन्हें अपने घर ले आए।

इसके बाद इसरार ने पृथ्वी दमोह बुलाया। लॉकडाउन खत्म होने के बाद पृथ्वी अपनी पत्नी के साथ कार से दादी को लेने कोटतला पहुंचा। पृथ्वी जिस समय अपनी दादी को लेकर कोटतला से जा रहा था, उस समय कोटतला का माहौल काफी भावुक हो गया। गाँव के लोगों को अच्छन मौसी से बिछड़ने का गम तो था ही, साथ ही इस बात की खुश भी थी कि वह अपने परिवार से मिल गई है।

Written by XT Correspondent

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