होशंगाबाद। मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले में रोजगार बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन रेशम उद्योग को बढ़ावा दे रहा है। इसके लिए रेशम विभाग से समन्वय स्थापित कर ज्यादा से ज्यादा शहतूत के पेड़ लगाए जाएंगे। साथ ही क्षेत्र के आदिवासियों को रेशम योजना का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया जाए।
दरअसल कोरोना संकट के कारण लोगों को आर्थिक नुकसान हुआ है। इस कारण लोगों को आर्थिक मंदी से उबारने के लिए कलेक्टर धनंजय सिंह ने रेशम उद्योग से रोजगार बढ़ाने की योजना पर काम करने के निर्देश दिए हैं।
रेशम विभाग के पूर्व अधिकारी का कहना है कि होशंगाबाद जिले का वातावरण और मिट्टी ऐसी हैं, जिसमें बेहतर किस्म का सिल्क प्राप्त होता है। यहां मलबरी, टसर, इरा और मूंगा किस्म के सिल्क का उत्पादन होता है। ऐसे में शासन यहां पर रेशम उत्पादक महासंघ बनाकर हजारों लोगों को रोजगार दे सकता है।
बता दे कि देश में 65 फीसदी सिल्क चीन से आयात किया जाता है। इन दिनों सीमा पर चीन से चल रही तनातनी के कारण देश में चीनी वस्तुओं के बहिष्कार की मांग उठने लगी है। ऐसे में आने वाले समय में चीन से सिल्क का आयात प्रभावित हो सकता है। इसको देखते हुए देश में सिल्क की आपूर्ति के लिए होशंगाबाद में रेशम उत्पादन को बढ़ाया जाना चाहिए। इससे चीन पर निर्भरता भी कम होगी और लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
