May 4, 2026

एक गाँव जहाँ आठवीं दसवीं के बाद चाहकर भी नहीं पढ़ पाती लडकियाँ

देवास। “एक तरफ लडकियाँ हवाई जहाज उड़ा रही हैं लेकिन हमारे गाँव की लड़कियों के लिए तो पढ़ना भी मुश्किल है। हमारे भाग ही फूटे है कि हमें आठवीं-दसवीं के बाद घर बिठा लिया जाता है।” यह बात कहते हुए आफरीन रुआंसी हो जाती है। अकेली आफरीन ही नहीं, पूरे गाँव की लड़कियों की यही कहानी है।

इस गाँव के लिए नदी किसी अभिशाप से कम नहीं है। नदी की वजह से ही गाँव की लडकियाँ आठवी-दसवीं से आगे पढ़ नहीं पा रही हैं। बीते तीस सालों में यहाँ से कोई भी लड़की दसवीं के आगे पढ़ नहीं सकी। इस कारण उनकी ज़िन्दगी बर्बाद हो रही है।

देवास से महज पच्चीस किलोमीटर की दूरी पर सीमावर्ती गाँव हिरली की यह कहानी चौंकाती है। यहाँ बीते कई सालों से महज पांचवीं तक का ही स्कूल है। इससे आगे पढने के लिए आठ किलोमीटर दूर बैरागढ जाना पड़ता है। दरअसल बैरागढ़ जाने के लिए लड़के तो चले जाते हैं लेकिन सुरक्षा और अन्य कारणों से गाँव के लोग अपनी लड़कियों को बैरागढ़ नहीं भेज पाते हैं। गाँव के दूसरी तरफ इंदौर जिले के सांवेर ब्लॉक के गाँव का स्कूल महज डेढ़ किलोमीटर है। लेकिन इसमें उफनती हुई शिप्रा नदी को पार करना पड़ता है। करीब 200 फीट लंबा नदी का पाट है जिसे पार करने के लिए गाँव के लोगों ने जुगाड़ की नाव बनाई हैं। दसवीं तक की पढाई करने वाली लड़कियों को इस जुगाड़ की नाव से हर दिन गुजरना पड़ता है। इस कारण कई लड़कियाँ नहीं पढ़ पाती हैं।

गाँव भर में करीब पचास से ज़्यादा लड़कियाँ ऐसी हैं जो आठवीं-दसवीं तक पढ़कर अपने घर के काम-काज और चौका-चूल्हा कर रही हैं। लड़कियों के पालक कय्यूम शेख बताते है कि हम भी अपनी लड़कियों को पढ़ाना चाहते हैं लेकिन कैसे पढाएँ। एक तरफ नदी है तो दूसरी तरफ सुनसान रास्ता, हम बच्चियों को अकेले खतरे में जाने नहीं दे सकते। जब शहरों में ही बच्चियाँ सुरक्षित नहीं है तो गाँव की कौन कहे।

सामाजिक कार्यकर्ता फारूख पटेल बताते हैं कि यहाँ ज्यादातर किसान परिवार के लोग हैं। वे सुबह से ही खेतो पर निकल जाते हैं। लड़कियों को अकेले स्कूल भेजना और उनकी सुरक्षा का ध्यान रखना मुश्किल होता है। सरकार या तो नदी पर पुल बना दे या बच्चियों के लिए स्कूल का प्रबंध कर दे।

जनप्रतिनिधि शरीफ पटेल बताते हैं कि वे बीते बीस सालों से यहाँ पुल के लिए कोशिश करते रहे हैं। उन्होंने अपने सरपंच रहते हुए यहाँ से कई प्रस्ताव भी भेजे लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। आमना बी कहती हैं कि बच्चियाँ पढ़ नहीं पाती तो उन्हें अच्छा घर बार कहाँ से मिले? मज़बूरी में किसी भी गाँव या परिवार में उनकी शादी कर देनी पड़ती है। हम इस बात से बहुत परेशान हैं।

Written by XT Correspondent

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