इंदौर। कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए देश में लगाए गए लॉकडाउन का असर अब खेती-किसानी और इससे संबंधित सेवाओं पर नहीं पड़ेगा। सरकार ने कृषि व सम्बंधित वस्तुओं, सेवाओं और क्रियाकलापों को आवश्यक छूट प्रदान कर दी है। इससे फसलों की कटाई, बुआई और उन्हें बेचने के कार्यों में बाधाए नहीं आएगी। यही नहीं रबी फसलों की आवक को देखते हुए सभी मंडियों को खुला रखने का निर्णय लिया है। हालांकि इस दौरान सामाजिक दूरी बनाए रखने के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा।
दरअसल सरकार ने लॉकडाउन के कारण कृषकों को रबी की फसल कटाई में आ रही दिक़्क़तों एवं ज़ायद फसल के लिए बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में सरकार ने निर्णय लिया है कि लॉकडाउन के दौरान कृषि से संबंधित सारे कार्य बिना किसी व्यवधान के किए जा सकेंगे। ताकि लॉकडाउन के दौरान भी देश की जनता को खाद्यान्न उपलब्ध करवाया जा सके और किसानों व आम जनता को कोई परेशानी नहीं आएं। इस आदेश के सख्ती से पालन के लिए भारत सरकार के संबंधित मंत्रालयों, विभागों, राज्यों व संघ शासित प्रदेशों के प्राधिकृत अधिकारियों को निर्देशित किया गया है।
गृह मंत्रालय के द्वितीय परिशिष्ट के अनुसार, ‘कृषि उत्पादों की ख़रीद से संबंधित संस्थाओं व न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित कार्यों, कृषि उत्पाद बाजार कमेटी व राज्य सरकारों द्वारा संचालित मंडियों, उर्वरकों की दुकानों, किसानों व कृषि श्रमिकों द्वारा खेत में किए जाने वाले कार्यों, कृषि उपकरणों की उपलब्धता हेतु कस्टम हायरिंग केंद्रों (सीएचसी) और उर्वरक, कीटनाशक व बीजों की निर्माण व पैकेजिंग इकाइयों, फसल कटाई व बुआई से संबंधित कृषि व बाग़वानी में काम आने वाले यंत्रों की अंतरराज्य आवाजाही को भी छूट दी गई है।‘
बता दे कि वित्त मंत्री ने आर्थिक नीतियों में ढील देने की घोषणा करी थी तभी किसान संगठनों ने कृषकों के लिए कृषि क्षेत्र में रियायत देने के लिए केंद्र पर दबाव बनाया था। इसके अलावा यूपी, राजस्थान आदि कई राज्यों ने पूर्व में कृषि कार्यों पर पूर्व से ही रियायत देने की घोषणा कर दी है।
