आगर-मालवा। तालाब के मध्य तैरती हुई दिखाई दे रही यह छतरी असल में एक महल का ऊपरी हिस्सा है। यह तालाब करीब 60 फीट ऊँचे महल को अपनी आगोश में लिए हुए हैं। इस महल के कई दरवाजे हैं और यह चारों तरफ से खुला हुआ है। पानी में डूबा रहने वाला यह महल अपने अंदर कई रहस्यों को समेटे हुए हैं।
भोपाल के बाद आगर-मालवा में प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा तालाब मौजूद है। यह तालाब काफी बड़ा और गहरा है। तालाब की खासियत यह है कि इसके अंदर एक महल स्थित है। यह महल हमेशा पानी में डूबा हुआ रहता है। हालाँकि साल 2000 के आसपास जब आगर-मालवा में चार सालों से पानी नहीं गिरा था, तब तालाब का पानी काफी हद तक सूख गया था और यह महल पूरी तरह से पानी मुक्त हो गया था। तब लोगों ने पहली बार महल को देखा और यहाँ लोगों का हुजूम उमड़ने लगा। आसपास के क्षेत्र से लोग इस महल को देखने आने लगे। हालाँकि उसके बाद से यह महल कभी पानी से मुक्त नहीं हुआ।
इस महल को लेकर किद्वंती है कि यहाँ पर हजारों साल पहले एक व्यक्ति ने अपने बेटे और बहु की बली दी थी। बली देने के बाद यह महल बनाया गया। महल के ऊपर एक छतरी बनाई गई। लोगों का मानना है कि उसके बाद से ही यह तालाब कभी नहीं सुखा। महल के ऊपर बनाई गई छतरी कभी डूबती नहीं है और महल कभी पानी से बाहर आता नहीं है।
इसके अलावा एक किद्वंती यह भी है कि पहले इस तालाब से दो हाथ भोग लेने के लिए आया करते थे। नगर पटेल द्वारा यहां उन्हें प्रसाद चढ़ाया जाता था। किंतु एक बार किसी व्यक्ति द्वारा गलत पदार्थ प्रसाद में दिए जाने के बाद यह हाथ आना बंद हो गए।
तालाब के मध्य जो छतरी दिखाई देती है, उसका दृश्य बड़ा ही मनोहारी है। संध्या के समय जब सूर्य डूबता है, तब पानी की लालिमा और छतरी लोगों को काफी सुख देती है। पानी के मध्य बना महल और ऊपर दिखाई देने वाली छतरी दर्शनार्थियों को अपनी और आकर्षित करने में कोई कमी नहीं छोड़ती है।
