रीवा। किसी समय पाकिस्तान, श्रीलंका सहित देश के कई शहरों के लोगों के मुंह का स्वाद बढ़ाने वाला बंगला पान आज अपनी पहचान खोता जा रहा है। गुटखे के चलन से पान की खेती को हुए नुकसान के कारण किसान इससे मुंह मोड़ते रहे हैं। इससे पान की खेती करने वाले किसानों के सामने रोजगार का संकट आ खड़ा हुआ है। वहीँ जो किसान अब भी पान की खेती कर रहे हैं, उनकी फसल ओला गिरने से ख़राब हो गई है। ऐसे में पान की खेती करने वाले किसान काफी दुखी है।
दरअसल किसी समय रीवा जिले के ग्राम मंहसांव सहित आसपास के गाँव में पग-पग पर पान की खेती हुआ करती थी। यह इलाका पान की खेती के देश-दुनिया में जाना जाता था। यहां का बंगला पान विश्वप्रसिद्ध पान हुआ करता था। लोग इसे बड़े शौक से खाते थे। ये पान भारत के कोने-कोने और पाकिस्तान, श्रीलंका सहित कई देशों में बंगला पान लोगों के मुंह का स्वाद बनाया करता था।
पान की खेती यंहा के चौरसिया समाज के किसानो का पुस्तैनी धंधा हुआ करता था जो उन्हें विरासत में मिलती थी। लेकिन बदलते दौर में पान की जगह गुटखा और पान मसाले ने ले ली है। इससे पान की खेती करने वाले किसानों को नुकसान होने लगा। इस कारण धीरे-धीरे किसान पान की खेती से किनारा करने लगे है। आज स्थिति यह है कि देश-विदेश में पहचाने जाना वाला बंगला पान आज अपनी पहचान खोता जा रहा है।
पान की खेती करने वाले किसानों के पास दूसरा कोई रोजगार नहीं है। वह जैसे-तैसे मेहनत-मजदूरी और दूसरा काम करके अपना घर चला रहे हैं। कुछ किसान पान की खेती को बचाये रखने के लिए घाटे के बावजूद इसकी खेती कर रहे है, लेकिन ठंड और ओले के कारण उनकी फसल भी बर्बाद हो गई। को कीं पहले ही घाटा झेल रहे थे, उन्हें मौसम की मार ने और बर्बाद कर दिया।
एक समय था जब पान की खेती करने वाले किसानो को पान की खेती से काफी फायदा होता था। इसी से वो बच्चों का लालपालन और पढ़ाई-लिखाई सहित पूरा घर चलाते थे। लेकिन अब ये हालात है कि इससे बच्चों की पढ़ाई तो दूर किसी तरह से उनका घर चल जाए यही काफी है। प्रदेश में सरकार बदली तो पान की खेती करने वाले किसानो की उम्मीदे भी बढ़ी। ये किसान इस बात की आस लगाए हुए है कि शायद प्रदेश सरकार इस ओर ध्यान दे और पान की खेती को बढ़ावा दे। जिससे यंहा का बंगला पान एक बार फिर देश विदेश में अपनी पहचान बना सके।
पान एक ऐसी चीज है जो भगवान के पूजा सामग्री में काम आती है। साथ ही इसका उपयोग शादी बारात में भी किया जाता है। शादी बारात में इसे खिलाना एक व्यवहार माना जाता है। लेकिन अब समय का तकाज़ा है कि शादी-बारात में भी पान का उपयोग बहुत कम हो गया है। अगर पान की खेती का यही हाल रहा तो वो समय दूर नहीं जब यंहा का बंगला पान जो कभी देश-विदेश में एक पहचान हुआ करता था वो खुद अपनी पहचान पूरी तरह खो देगा।
