देवास। जिस उम्र में लोग काम धंधा छोड़कर बिस्तर पकड़ लेते हैं। उस उम्र में एक महिला ने कंप्यूटर चलाना शुरू किया। अपने पोते की उम्र के बच्चों के साथ कंप्यूटर चलाना सीखने पर महिला की काफी हंसी भी उड़ाई गई। लेकिन महिला परवाह किए बिना कंप्यूटर चलाना सीखती रही। आख़िरकार महिला की मेहनत रंग लाई और उसने हँसी उड़ाने वाले बच्चों को पछाड़ते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया।
देवास जिले के बागली में रहने वाली 78 वर्षीय विद्या बाई नरवरिया की कहानी बढ़ती उम्र का हवाला देकर हार मानने वालों के लिए एक मिसाल है। उन्होंने 2008-09 में 68 साल की उम्र में कंप्यूटर चलाना सीखने की शुरुआत की। दरअसल उनके पति रामप्रसाद नरवरिया का आकस्मिक निधन हो गया था। कुछ समय बाद उनके जवान बेटे खेलेन्द्र की दुर्घटना में मौत हो गई। ऐसे में विद्याबाई छोटे बच्चों को कोचिंग पढ़ा कर अपना समय व्यतीत करने लगी।
साल 2008-09 में घर के पास कम्प्यूटर क्लास प्रारम्भ होने पर विद्याबाई को कंप्यूटर सीखने की उत्सुकता हुई। इस उम्र में कम्प्यूटर चलना व अंग्रेजी में तंग हाथ के कारण शुरुआत में पुत्र प्रवीण ने संकोच किया। कम्प्यूटर क्लास संचालक भी उन्हें टालता रहा। लेकिन विद्याबाई का जुनून उन्हें कम्प्यूटर क्लास तक लेकर गया।
शुरुआत में गलतियों पर बच्चे हसीं उड़ाते थे, लेकिन विद्या बाई ने हिम्मत नहीं हारी। वह नियमित क्लास में पूर्ण लग्न से प्रशिक्षण प्राप्त करती रही। विद्या बाई ने हिन्दी कम्प्यूटर टाइपिंग के लिए गत्ते पर कंप्यूटर के कीबोर्ड बनाकर उंगलियों से प्रैक्टिस की। कोरल, एमएस वर्ड, पेजमेकर सहित अन्य सॉफ्टवेयर चलना सीखा। एक वर्ष के प्रशिक्षण के बाद जब राजीव गांधी साक्षात मिशन द्वारा परीक्षा आयोजित की। विद्या बाई ने इस परीक्षा में भाग ही नहीं लिया बल्कि बी प्लस ग्रेड के साथ क्लास में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
कम्प्यूटर की शिक्षा विद्या बाई के जीवन में काफी काम आई। जब उनके पुत्र प्रवीण गम्भीर बीमारी से पीड़ित हो गए थे तो उन्होंने पुत्र के सरकारी कार्यों, पत्रों, नक्शे को बखूबी कम्प्यूटर से तैयार किया। इंटरनेट पर पुत्र की बीमारी के इलाज व मेडिसिन की जानकारी सर्च करते अपने ज्ञान का सही व भरपूर उपयोग किया। हालाँकि उनके पुत्र का वर्ष 2017 में असामयिक निधन हो गया था।
विद्या बाई आज 78 वर्ष की उम्र में भी कम्प्यूटर पर बेहतर कार्य कर लेती है। इंटरनेट पर लेखकों की किताब पढ़ने के अतिरिक्त आस पास के बच्चों की छोटी बड़ी परेशानियों का समाधान भी कर लेती है।
