नरसिंहपुर। अपने गुनाहों का बोझ लिए जेल की सलाखों के पीछे सजा काट रहे बंदियों के मन का अँधेरा दूर करने के लिए जेल प्रशासन ने अनूठी पहल शुरू की है। जेल प्रशासन की पहल पर जेल के अंदर भागवत कथा और स्कंध पुराण का वाचन किया जा रहा है। ताकि कैदियों का अंतर्मन शुद्ध हो और जब वह जेल से बाहर निकले तो समाज उन्हें स्वीकार कर सके।
दरअसल नरसिंहपुर की केंद्रीय जेल में इन दिनों धर्माचार्य रमन महाराज द्वारा भागवत कथा और स्कंध पुराण का वाचन किया जा रहा है। ईश्वर की भक्ति भाव में खुद को आत्मसात किए बंदियों को देख कोई भी नहीं कह सकता कि उनके हाथों कभी ऐसे भी गुनाह हुए है जिससे किसी का परिवार ही उजड़ गया हो। जेल प्रशासन का मानना है कि ऐसा करने से बंदियों की मानसिकता में सकारात्मक परिवर्तन आएगा। धर्म से इन्सान को सही-गलत का आभास होता है।
जेल में बंद कैदी का मानना है कि इस धार्मिक आध्यात्मिक आयोजन से उनके अंतर्मन को शांति मिल रही है। उनके द्वारा जाने अनजाने जो भूल हुई है उसे सुधारने का हमे मौका मिल रहा है। जेल अधीक्षक की इस पहल से हमें अपने द्वारा किए गए गुनाहों का अपराधबोध हो रहा है। आध्यात्म की ओर जाने से हमारे अंदर दया भाव का निर्माण हो रहा है। इससे जब हम जेल की इस चार दिवारी से बाहर जाएँगे तो खुद को समाज के अनुरूप बेहतर इंसान बनाकर जीवन जी सकेंगे।
जेल की महिला अधीक्षक का भी यही मानना है कि आपराधिक मानसिकता को दूर करने के दो ही रास्ते है परिवार का प्रेम या फिर धर्म। बंदियों की मानसिकता में परिवर्तन लाने के लिए ही हम धार्मिक अनुष्ठान का सहारा ले रहे है क्यों कि धर्म ही है जो हमें सही गलत का आभास करता है। नैतिक-अनैतिक के बीच का फर्क बताता है। हमारी इस कोशिश का बंदियों के मन से प्रभाव भी देखा जा है और उनके व्यवहार में बदलाव की आने लगा है।
