छिंदवाड़ा। आदिम जनजातियों की कला व संस्कृति तथा परम्परा को संरक्षण देने के लिए सरकार ने भारिया महोत्सव का आयोजन किया गया। इस आयोजन की मदद से सरकार आदिवासियों की संस्कृति और नृत्य कला को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाना चाहती है।
दरअसल भारिया महोत्सव का आयोजन सतपुड़ा की सुरम्य वादियों में बसे पातालकोट के ग्राम चिमटीपुर में किया गया। इस महोत्सव को लेकर आदिम जनजाति भारिया तथा बैगा में विशेष उत्साह है। दो दिनों तक चले भारिया महोत्सव में आदिम जनजातियों की कला व संस्कृति का परिष्कार किया गया। इसके लिए बाकायदा विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया था।
भारिया महोत्सव में डिण्डोरी जिले के बैगा तथा छिन्दवाड़ा जिले के पातालकोट क्षेत्र के भारिया जनजातियों ने अपनी सुंदर कला व संस्कृति का परिचय दिया। वहीँ गोंड जनजाति के कलाकारों ने भी अपनी विभिन्न नृत्य व संगीत शैली का प्रस्तुतिकरण दिया।
दरअसल आदिम जातियों की संस्कृति और परंपरा को संरक्षण देने के लिए शुरू किए गए भारिया महोत्सव के शुभारम्भ पर छिन्दवाड़ा के सांसद नकुल नाथ ने कहा था कि, “हरसंभव तरीके से आदिवासियों की संस्कृति को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जायेगा। साथ ही उनके विकास के लिये क्षेत्र में कल्याणकारी कार्य किये जायेंगे। उनके स्व-रोजगार की दिशा में तथा पेयजल, सिंचाई आदि के क्षेत्र में प्रदेश सरकार कार्य करने के लिये प्रतिबध्द है।
भारिया महोत्सव से पातालकोट सहित आस-पास की आदिम जातियों में उत्साह है और उन्होंने बढ़-चढ़ कर इस महोत्सव में हिस्सा लिया। उनकी कला व संस्कृति को देखने दूर-दूर से पर्यटक भी आए।
