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मॉल का जीएम (जनरल मैनेजर)कर रहा था छेड़खानी पीड़िता पुलिस के लगाती रही चक्कर 6 माह बाद हुई एफ़आइआर दर्ज लेकिन इससे पहले ही मॉल प्रबंधन द्वारा आरोपी जीएम (जनरल मैनेजर) को नौकरी से बाहर कर दिया गया।
“इंदौर की कनाड़िया पुलिस ने फीनिक्स सिटाडेल शॉपिंग मॉल के पूर्व जनरल मैनेजर राजेश गोविद स्वामी के खिलाफ सोमवार देर रात छेड़छाड़ और अश्लील हरकत करने का प्रकरण दर्ज किया है। स्वामी ने फरवरी में महिला गार्ड से छेड़छाड़ की थी। मॉल मैनेजमेंट इस प्रकरण की जांच कर रहा था। सीसीटीवी फुटेज एवं बयानों के आधार पर मैनेजमेंट ने स्वामी को दोषी पाया और जांच रिपोर्ट पीड़िता को दी। जिसे लेकर वह थाने पहुंची, पर वहां भी उसे 4 घंटे इंतजार करना पड़ा।”
पुलिस थाना कनाडिया के अनुसार घटना 17 फरवरी 2025 की सुबह 11 बजे की है। पीड़िता एसटी-6 गार्बेज एरिया (यहां मॉल से निकलने वाले कचरे की इंट्री की जाती है) में ड्यूटी कर रही थी। एक शॉप का कर्मचारी कचरा फेंकने आया था, उसकी इंट्री कर रही थी, तभी जीएम राउंड पर पहुंचे और कहा कि कचरा फेंकने का समय खत्म हो गया। पीड़िता ने कचरा लेने से इनकार कर दिया और रजिस्टर लेकर ड्यूटी पोस्टिंग की जगह चली गई।”
“पीड़िता ने पुलिस को बताया कि वहां जीएम ने तीन-चार आवाज लगाई, तब वह उनके पास पहुंची और दरवाजा खोला तो जीएम ने उसे टच किया और गलत हरकत भी की। वह वहां से छूटकर पोस्ट पर वापस आई। पीछे से जीएम भी वहां आ गए।”
“जीएम राजेश की हरकत से परेशान होकर वह रोने लगी, तो मॉल के सिक्योरिटी सुपर वाइजर वहां पहुंचे और पूछा, पूरी बात बताने पर उन्होंने मैनेजमेंट को घटना की जानकारी देने को कहा। इसका पता चलते ही शाम को जीएम ने माफी मांग ली।”
“जीएम ने इसके बाद पीड़िता के मोबाइल पर कॉल करना शुरू कर दिया। परेशान हो चुकी पीड़िता ने फिर से सिक्योरिटी सुपर वाइजर से बात की, तो उसने मैनेजमेंट को बताने को कहा। फिर मैनेजमेंट को बताया गया, तो मैनेजमेंट ने जांच कमेटी बैठाने का भरोसा दिलाया और पीड़िता को छुट्टी पर भेज दिया गया। कुछ दिन बात बुलाया, पर स्टाफ का उसके प्रति व्यवहार बदल गया।”
“मैनेजमेंट की जांच में जीएम स्वामी दोषी पाए गए। जांच के दौरान जांच दल ने मॉल के उस स्थान के सीसीटीवी फुटेज निकाले, जहां छेड़छाड़ की गई थी। पीड़िता और अन्य कर्मचारियों के बयान लिए गए। जांच में दोषी पाए जाने पर जीएम से इस्तीफा ले लिया गया। वहीं आगे की कार्रवाई के लिए पीड़िता को जांच रिपोर्ट सौंप दी गई। इसके बाद पीड़िता थाने पहुंची और वकील की मदद से शिकायत की।”
“पीड़िता की मुश्किलें थाने में भी कम नहीं हुईं। उसकी व्यथा सुनने के लिए थाने में महिला अफसर नहीं थीं। वह शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक थाने में बैठी रही। 9 बजे दूसरे थाने से महिला अफसर आईं, तब जाकर पीड़िता ने अपनी व्यथा बताई और उसकी एफआईआर दर्ज की गई। थाने में रहते हुए भी उस पर एफआईआर न कराने को लेकर दबाव बनाया जाता रहा।”
