इंदौर। देपालपुर तहसील के ग्राम काली बिल्लोद गांव में एक अनूठा काम होने जा रहा है। यहां प्रदेश की पहली मानव मलजल प्रबंधन इकाई स्थापित की जा रही है। जो मानव मल और व्यर्थ बहने वाले घरेलू पानी को दोबारा उपयोग में लाने लायक बनाएगी। अंतर्राष्ट्रीय संस्था वॉटर एड इस काम में पंचायत की सहायता कर रही है। जिला पंचायत और संस्था वॉटर एड की कोशिश है कि इस इकाई का संचालन अगले दो-तीन महीने में ही शुरू कर दिया जाए यदि ऐसा होता है तो यह देश में यह इस तरह की पहली कारगर इकाई होगी।
स्वच्छ भारत अभियान के तहत गांव खुले में शौच से मुक्त तो हो गए लेकिन इनमें बनाए गए सेप्टिक टैंकों से गंदगी निकालना भी एक बड़ी जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से भारत सरकार के जलशक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने देशभर में 23 राज्यों में मानव मल प्रबंधन इकाई बनाने का प्रस्ताव दिया है। यह इकाई बांग्लादेश जैसे देशों में काफी सफल रही है और अब सरकार की कोशिश है कि इसे भारत में भी लागू किया जाए।
विभाग द्वारा इसके लिए प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर इंदौर में इकाई शुरु करने की इच्छा जताई गई। जिसके बाद काली बिल्लोद पंचायत का चयन हुआ। काली बिल्लोद एक किस्म की अर्बन या शहरी पंचायत है जहां पंचायत और आसपास करीब पैंतीस हजार की आबादी है और दर्जनभर से अधिक कई रिहायशी कॉलोनियां भी हैं। भारत सरकार के इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए जल प्रबंधन और स्वच्छता के लिए काम करने वाली अंर्तराष्ट्रीय संस्था वॉटर एड काली बिल्लोद पंचायत के साथ काम कर रही है जो संस्था यह प्लांट बनाकर इसका कुछ समय के लिए ही अपनी देखरेख में संचालन भी करवाएगी और फिर वर्ष 2021 में पूरी तरह पंचायत को सौंप देगी। इस प्लांट से मानव मल को बैक्टीरिया रहित कर उसे गीले कचरे से खाद बनाया जाएगा वहीं प्रदूषित जल को साफ कर खेती और मछली पालन के काम में लिया जाएगा।
काली बिल्लोद सरपंच नर्मदा गणेश परमार भी इस प्रोजेक्ट को लेकर उत्साहित हैं और वे लगातार पंचायत क्षेत्र में घूम घूमकर लोगों को इसके बारे में जागरुक कर रहे हैं। मानव मल प्रबंधन के बारे में लोगों को बताने के लिए पंचायत और संस्था वॉटरएड के माध्यम से गांव में नुक्कड़ नाटक और जागरुकता कार्यक्रम करवाए जा रहे हैं। पंचायत इसके लिए स्कूलों में जाकर भी जागरुकता कार्यक्रम कर रही है।
वॉटरएड इंडिया संस्था की प्रोग्राम कोआर्डिनेटर चंचल मोदी ने बताया कि प्रदेश में यह पहला प्लांट होगा। इसकी क्षमता 3-6 केएलडी (किलो लीटर पर डे) होगी। हम पंचायत के साथ मिलकर यह पायलट प्रोजेक्ट कर रहे हैं। बाद में पंचायत इसे खुद ही संचालित करेगी।
वहीं जिला पंचायत सीईओ नेहा मीणा ने इस प्रोजेक्ट को लेकर कहा कि, यह शानदार होगा। काली बिल्लोद का चयन वहां की आबादी, कर स्थिति जैसे पैरामीटर पर हुआ है। पंचायत द्वारा जमीन का चयन कर लिया गया है, हम आने वाले साल में यह इकाई शुरू कर देंगे।
