बैतूल। मध्य प्रदेश का एक ऐसा गाँव जहाँ आज भी भूतों का मेला लगता है। यहाँ भूत-प्रेत के नाम पर मानसिक रोगियों का इलाज किया जाता है। इलाज का तरीका भी ऐसा कि जिसे देखकर ही दिल दहल जाए। भूतों का यह मेला पिछले चार सौ सालों से चला आ रहा है। यहाँ हर साल बड़ी संख्या में लोग पहुँचते हैं।
आस्था और अंधविश्वास की यह अनोखी तस्वीर देखने को मिलती है बैतूल जिले के मलाजपुर गाँव में। लगभग साढ़े चार हजार की आबादी वाले इस गाँव में गुरु साहब बाबा की समाधि है। मलाजपुर मे प्रति वर्ष पूष माह की पूर्णिमा से एक माह के लिये मेला शुरु होता है। इस मेले को भूतों का मेला कहा जाता है। इस मेले में देश के कोने कोने से वह मानसिक रोगी पहुँचते हैं, जिन्हें लगता है कि वह प्रेत बाधा से पीड़ित होते हैं।
गुरु साहब बाबा की समाधि के पुजारी भिखारी लाल यादव एक हाथ में झाड़ू लिए हुए बैठे रहते हैं। मानसिक रोगी के पहुँचने पर वह उसके बाल कस कर पकड़ कर पूछते है बाई है या भैया, किस जात की है, कहाँ से आई है, और क्यों इस बाई को क्यों लगी है। इस तरह वह भूतों से उसकी प्रजाति पूछते हैं। इसके बाद उन्हें कसम खिलाई जाती है कि वह उन्हें छोड़ दे। कुछ को तो झाड़ू भी मार देते है। पुजारी बताते है कि मार से भूत भागने के बाद वहां लगे बरगद के पेड़ पर अपना स्थान बना लेते हैं। यही कारण है कि इस पेड़ के पत्ते हमेशा झुके रहते हैं।
इस मंदिर की खास बात यह है कि यहाँ प्रसाद में चढ़ने वाले गुड़ पर मक्खियां नहीं लगती। यही वजह है कि यहाँ गुड सालों साल रखा रहता है। प्रेत बाधा के अलावा यहाँ सर्पदंश से मुक्ति भी मिलती है यही नहीं यहाँ, निसंतान दम्पति संतान की इच्छा लिए आते हैं। इस समाधी पर तीस वर्षो से पूजा कर रहे पुजारी राजाराम बताते है कि गुरु साहब बाबा कि महिमा है कि यंहा आने के बाद भूत प्रेत से छुटकारा मिल जाता है।
ख़ास बात यह है कि भूतों के मेले में बड़ी संख्या में पढ़े लिखे लोग भी पहुँचते हैं और इस परम्परा पर अपना विश्वास जताते हैं। उनका कहना है कि पहले वे इसे अंधविश्वास मानते थे लेकिन जब देखा कि यहाँ आराम लगता है तो विश्वास होने लगा है।
लोगों का कहना है कि आधुनिक युग में भी लोग प्रेत बाधा से पीड़ित है। इसका कोई डाक्टरी ईलाज नही है। ऐसे में लोग तांत्रिकों के चक्कर में आकर लुट जाते हैं। लेकिन यहाँ पर उतरवाने के बदले कोई दक्षिणा नहीं ली जाती है। यहाँ पर प्रेत बाधाओं के अलावा संतान प्राप्ति और सर्प दंश में भी लोगों को लाभ मिलता है। मरीजों का कहना है कि उनकी अज्ञात बिमारी का इलाज हर जगह करा लिया लेकिन कोई लाभ नहीं मिला। अब यहाँ आए तो लाभ मिला। पहले यह सब अंधविश्वास लगता था लेकिन जब खुद पर बीती तो भरोसा होने लगा। हर साल यहाँ आकर ही लाभ मिलता है।
मंदिर के पुजारी भिखारी लाल यादव का कहना है कि समाधि पर जो भी मन्नत लेकर आते है वो पूरी होती है। यहाँ प्रेत बाधा, सर्पदंश और निसंतान दंपत्ति आते है। गुरु साहब के चमत्कार से प्रेत बाधा दूर हो जाती है। अगर कोई बाधा आसानी से नहीं जाती तो उसे मारना भी पड़ता है।
वहीँ स्थानीय निवासी विजय आर्य का कहना है कि वैसे तो मलाजपुर आम गांव की तरह है लेकिन यहाँ गुरु साहब की महिमा अपरंपार है। गांव की पहचान भूतों के मेला के नाम से होती है। यहाँ पर विदेशों से भी लोग आकर रिसर्च करके गए है। हम लोगो ने खुद गुरु साहब के चमत्कारों को महसूस किया है इसलिए समाधी पर पूरी आस्था है।
मलाजपुर पहुंचें पीड़ित के परिजन कुँवर लाल ने बताया कि वह यहाँ अपनी बेटी को लेकर आए है। बेटी का पहले हर जगह इलाज कराया लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। अब यहाँ आए है तो लाभ मिला है।
