उमरिया। एक ऐसा शख्स जो आँखों से दुनिया को देख नहीं सकता। लेकिन उनकी कला ने दुनिया को उसका कायल कर दिया है। रंगमंच पर जब वो अभिनय करता है तो यकीन कर पाना मुश्किल है कि उसे दिखाई नहीं देता। यह शख्स अब तक दिल्ली, असम, लखनऊ, जबलपुर, भोपाल तथा उज्जैन जैसे शहरो के रंगमंच पर अपनी अमिट छाप छोड़ चुका है। यह शख्स आंखे नहीं होने के बावजूद अभिनय ही नहीं बल्कि अपना सारा काम खुद कर लेता है।
अपने मन की आँखों से दुनिया को देखने वाले इस शख्स का नाम है दुखी लाल। उमरिया के रहने वाले दुखी लाल को आँखों से कुछ दिखाई नहीं देता है। इसके बाद भी वह मंच इतनी अच्छी तरह से किरदार निभाते हैं कि लोग तारीफ़ करते नहीं थकते। दुखी लाल को अभिनय करते देख किसी के लिए यकीन करना मुश्किल है कि इन्हें दिखाई नही देता। उनकी कला के बहुत कद्रदान है। दुखी लाल अपने जौहर को अभिनय के माध्यम से निखारते हुए परिवार का जीवन सुखमय बनाये हुए है। दुखी लाल का परिवार रंगकर्म से लेकर दैनिक जीवन के कामकाजों में उसकी भरपूर मदद करता है। उनकी पत्नी आम गृहिणी है और उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलती है।
उमरिया जिले में 25 सालों से रंगमंच की विधा को जिन्दा रखने में जुटी संदेश नाट्य संस्था ने भी दुखी लाल का भरपूर सहयोग किया है। मंच में अभिनय के तौर तरीकों से लेकर भाव भंगिमा और वाकपटुता और आवश्यक शिक्षा बताई गई। संदेश नाट्य मंच के सहायक निर्देशक का कहना है कि ईश्वर ने दुखीलाल को अद्भुत शक्ति प्रदान की है। वह बिना किसी सहारे के मंच पर कैसे लाइट्स लेनी है, कैसे साउंड कवर करना है, कितना दायां या बयां जाना है जैसे काम कर लेता है। ऐसा लगता है जैसे वह थियेटर के लिए ही बना हो। वह अपना काम पूरी शिद्दत और समर्पण के साथ करता है। सभी दिशाओ में उसका अंदाज़ा बहुत जबरदस्त है।
कहते है कि अगर ईश्वर एक इन्सान से कुछ छीन लेता है तो उसे कुछ अद्भुत चीज दे देता है। रंगकर्मी दुखी लाल अपने हुनर के दम पर आज देश और प्रदेश में अपने हुनर का डंका बजा रहे है।
