सागर। मंगलवार को सागर जिले के बम्होरी बीका गांव की सैकड़ों महिलाएं सड़क पर उतर आई। महिलाओं ने पहले ग्राम सचिव और उसके बाद सरपंच के आवास के सामने अनाज की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान महिलाओं ने सरकार विरोधी नारे लगाए। हालांकि बाद में पुलिस मौके पर पहुंची और महिलाओं को समझाइश देकर घर भेजा।
कोरोना संकट में सरकार भले ही गरीब निर्धन असहायों को हर संभव मदद देने की बात कह रही है, लेकिन जमीनी हकीकत देखकर सरकार की नाकामी को साफ-साफ देखा जा सकता है। हालात यह है कि नरयावली से भाजपा के विधायक प्रदीप लारिया की विधानसभा क्षेत्र के बम्होरी बीका गांव में दलित महिलाओं को राशन के लिए प्रदर्शन करना पड़ा। इस दौरान सोशल डिस्टेंस की धज्जियां उड़ती देखी गईं।
मंगलवार को सैकड़ों महिलाएं बिना किसी मास्क के ग्राम सचिव डालचंद अहिरवार के पास पहुंची और राशन अनाज की मांग करने लगीं। ग्राम सचिव से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के बाद महिलाएं गांव की सरपंच लाजवंती कोरी के यहां पहुंची। इस दौरान महिलाओं ने राशन की मांग की और सरकार विरोधी नारे लगाए।
महिलाओं का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा खातों में डाले गए 500 रुपये की राशी में आधे से ज्यादा हितग्राही फिंगर मैचिंग और कागजों की कमी के चलते वंचित रह गए। राशन के नाम पर सरकार ने तीन महीने का अनाज दिया जो एक महीने में ही खत्म हो चुका है। गांव के गरीब परिवारों के सामने भूखे मरने की नौबत आ गई है। स्वास्थ्य परीक्षण के नाम पर इस गांव में अभी तक कोई स्वास्थ्य महकमा नही पहुंचा है। सरकार ने उज्जवला खाता धारकों को फ़्री गैस सिलेंडर देने की घोषणा की है, लेकिन गैस भरवाने से पहले नगद भुगतान के चलते अधिकतर परिवार इस योजना से वंचित रह गए हैं।
सैकड़ों महिलाओं के बढ़ते हुजूम को देखकर ग्रामीणों ने पुलिस को जानकारी दी। जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और महिलाओं को समझाइश देकर घर पहुंचाया। कोरोना जैसी वैश्विक महामारी में केंद्र और प्रदेश की सरकारों ने गरीब निर्धन असहायों को हर संभव मदद देने के जो वादे किए हैं, उसकी जमीनी हकीकत देखकर सरकार की नाकामी को साफ-साफ देखा जा सकता है। अगर भूंखमरी के चलते इस तरह के हुजूम इकट्ठे होते रहे तो सरकार द्वारा किये लॉक डाउन का कोई लाभ नही रहेगा।
