इंदौर। कोरोना संकट में मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास केंद्र इंदौर जीवन रक्षक पीपीई किट के निर्माण में केन्द्रीय भूमिका निभा रहा है। लॉकडाउन से पहले इंदौर सहित प्रदेश में पीपीई किट का निर्माण करने वाली कोई इकाई नहीं थी, लेकिन आज प्रदेश में रोजाना सात हजार से आठ हजार किट का प्रतिदिन उत्पादन हो रहा है। आने वाले दिनों में यह संख्या दस हजार तक पहुंच जाएगी।
इंदौर केन्द्र के एमडी कुमार पुरुषोत्तम ने बताया कि मार्च, 2020 के मध्य से राज्य में कोरोना संक्रमित मरीजों के इक्का-दुक्का प्रकरण सामने आने लगे थे। कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज में संलग्न डाक्टर्स एवं पैरा मेडिकल स्टॉफ हेतु पीपीई किट की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती थी। साथ ही साथ संभावित मरीजों की संख्या को देखते हुए कंटेनमेंट क्षेत्र, क्वारंटीन क्षेत्र और क्वारंटीन क्षेत्र की व्यवस्था में लगे पुलिस कर्मियों एवं अन्य विभागों के कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए भी पीपीई किट की आवश्यकता महसूस हो रही थी। पूरे देश में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही थी। ऐसी स्थिति में यह स्पष्ट था कि पीपीई किट की आपूर्ति अन्य राज्यों से संभव नहीं हो सकेगी। इतने अल्प समय में बाहर के देशों से भी आयातित होकर पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेण्ट (पीपीई) किट का आना संभव नहीं था क्योंकि इसकी मांग पूरे विश्व में भी थी।
ऐसी स्थिति में मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव ने निर्णय लिया कि पीपीई किट के उत्पादन की स्थानीय व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मध्यप्रदेश विगत वर्षों में एक मैन्युफेक्चरिंग हब बनकर उभरा है तथा यहां वस्त्र उद्योग में कई बड़े नाम है, परंतु पीपीई किट का निर्माण करने वाली कोई इकाई यहां भी उपलब्ध नहीं थी। पीपीई किट के उत्पादन हेतु दो प्रमुख समस्या आ रही थी। पहला कच्चे माल की उपलब्धता और दूसरा निर्मित किट का प्रमाणीकरण। ऐसे में मुख्य सचिव के निर्देशों पर गुजरात, महाराष्ट्र तथा बेंगलुरू के उत्पादकों से चर्चा की जो, non woven polypropylene का उत्पादन करते हैं। भविष्य की मांग को देखते हुए लगभग दो लाख किट के लिए आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता विभिन्न प्रदेशों से सुनिश्चित की गई।
इसके बाद इंदौर क्षेत्र की वस्त्र उद्योग की सबसे बड़ी कंपनी प्रतिभा सिंटेक्स को पीपीई किट उत्पादन हेतु चयनित किया गया तथा उसके साथ अन्य कंपनियों इनोवेटिव, पेपकॉन एवं ट्रेंड्स अपेरल को जोड़ा गया। पीपीई किट के लिए प्रोटोटाइप हैज़मैट सूट का सैंपल प्रतिभा सिंटेक्स द्वारा तैयार किया गया तथा इसे टेस्टिंग के लिए डीआरडीओ ग्वालियर भेजा गया। टेस्टिंग में दोनों प्रकार के किट उपयुक्त पाये गये, एक डॉक्टरों के लिये तथा दूसरा पैरामेडिकल स्टॉफ एवं अन्य कर्मचारियों के लिए।
लॉक डाउन की अवधि में कर्मचारियों की उपलब्धता बड़ी चुनौती थी। इस हेतु प्रतिभा सिंटेक्स द्वारा अपने कर्मचारियों के लिए इकाई परिसर में ही हॉस्टल में रहने की व्यवस्था की गई। अन्य कंपनियों के कर्मचारियों को अत्यावश्यक सेवा वाले पास जारी किए गए, जिससे उनके आवागमन में असुविधा न हो। इसका नतीजा यह निकला कि पहले सप्ताह यानि 28 मार्च से लागभग 3000 पीपीई किट प्रतिदिन का उत्पादन करने में हमारी इकाइयां सक्षम हो गई। सभी हितधारकों के संगठित प्रयास किया गया एवं वर्तमान में यह क्षमता 7000 से 8000 किट प्रतिदिन तक पहुंच गई है।
उत्पादन को और अधिक बढ़ाने एवं पूरे राज्य की व्यवस्था स्थानीय स्तर हो सके इस हेतु ट्रायडेंट लिमिटेड, बुधनी को भी उनकी क्षमता को देखते हुए पीपीई किट्स के उत्पादन हेतु जोड़ा गया। इसका परिणाम यह है कि आगामी सप्ताह से प्रतिदिन 10 हजार किट बनाने की स्थिति में होंगे, जिसमें लगातार वृद्धि होती रहेगी। स्थानीय स्तर पर इस प्रक्रिया से दो फायदे हुए हैं। पीपीई किट की उपलब्धता तत्काल सुनिश्चित हो सकी तथा इस हेतु डिलिवरी एवं ट्रांसपोर्ट में लगने वाले समय की भी बचत हुई। स्थानीय स्तर पर गुणवत्ता का निरंतर परीक्षण होता रहा तथा उपयोगकर्ताओं जैसे डॉक्टर आदि से फीडबैक लेकर निरंतर सुधार भी किया गया।
आज पूरे प्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार में लगे डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टॉफ, सुरक्षा व्यवस्था में लगे पुलिसकर्मी तथा अन्य व्यवस्था में लगे कर्मियों को पीपीई किट उपलब्ध कराया जा रहा है। पुरुषोत्तम ने बताया है कि इंदौर में पर्याप्त मात्रा में पीपीई किट उपलब्ध हैं। जिला प्रशासन को आवश्यकतानुसार किट का अग्रिम प्रदाय कर दिया गया है। आईडीए के संपदा अधिकारी को किट भंडारण हेतु नोडल अधिकारी बनाया गया है।
