छतरपुर। छतरपुर जिला अस्पताल में अस्पताल प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां ऑपरेशन दौरान बच्चा बदलने का मामला सामने आने का बाद हडकम्प मच गया है। मामले में सिविल सर्जन द्वारा डीएनए टेस्ट करवाने का आश्वासन दिया गया। अब डीएनए टेस्ट के बाद ही पता चल पाएगा कि कौन सा बच्चा किस का है।
दरअसल नारायणपुरा रोड अमर गार्डन निवासी मुकेश शिवहरे रोड की 28 वर्षीय पत्नी आरती शिवहरे को जिला अस्पताल में आपरेशन से बेटी हुई जो कि मृत पैदा हुई। दूसरी तरफ ग्राम मठा थाना लवकुशनगर जिला छतरपुर निवासी सुनील पाल की पत्नी सरोज पाल के भी लड़की हुई जो जिंदा थी।
अस्पताल स्टाफ ने गलती से मृत पैदा हुई बच्ची को पाल परिवार को पकड़ा दिया। जबकि जिंदा बच्ची को शिवहरे परिवार को पकड़ा दिया। जब अस्पताल प्रशासन को गलती का एहसास हुआ तो बच्चों को बदला गया जिससे विवाद की स्थिति निर्मित हुई और बबाल मच गया।
जिनसे जीवित बच्चा लेकर उन्हें मृत बच्चा दिया गया वह आग बबूला हो गए और हंगामा करने लगे। वहीं जिन्हें जिंदा मिल गया वह मातम की जगह खुशियां मनाने लगे। परिजन यह मामला अस्पताल पुलिस चौकी ले गए और जिंदा बच्चे की मांग करने लगे।
कांग्रेस सेवादल जिला अध्यक्ष आदित्य कॉल ने भी मामले की गंभीरता के चलते परिजनों को ढांढस बंधाया और जांच करवाने की बात कहते हुए जिला कार्यकर्ताओं द्वारा कोतवाली जाकर आवेदन दिया। साथ ही सिविल सर्जन को भी आवेदन दिया और डीएनए टेस्ट की मांग। इस पर सिविल सर्जन द्वारा डीएनए टेस्ट करवाने का आश्वासन दिया गया।
वहीं प्रसूताओं से पुछा तो उन्होंने बताया कि हम तो OT में बेहोश थे हमें क्या पैदा हुआ हमें पता ही नहीं।
फिलहाल बच्ची को अस्पताल प्रशासन ने OT स्टाफ और डॉक्टरों की जिरह पर जिंदा बच्ची को परवरिश और सुरक्षा के लिए पाल फैमिली को सौंप दिया है। DNA रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो पायेगा कि बच्च्ची किसकी है। DNA में जो भी सामने आयेगा बच्ची आधिकारिक तौर पर उसी की होगी।
मामला चाहे जो भी हो पर इतना तो तय है कि अस्पताल प्रशाशन की जरा सी लापरवाही ने बड़ा बबाल खड़ा कर दिया और गंभीर स्थिति निर्मित कर दी।
