May 19, 2026

अंतरराष्ट्रीय बैगा चित्रकार जोधईया बाई चित्रकारी से दे रही समाज को संदेश

उमरिया। आदिवासी बाहुल्य उमरिया जिले की अंतरराष्ट्रीय बैगा चित्रकार जोधईया बाई अपनी चित्रकारी के माध्यम से समाज को कोरोना से बचने के संदेश दे रही है। जोधईया बाई ने कोरोना वायरस से बचाव के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और प्राकृतिक उपायों को कैनवास पर उकेरा है।

दरअसल वैश्विक महामारी कोरोना की रोकथाम के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने लॉकडाउन को 3 मई तक के लिए बढ़ा दिया है। सरकार ने सभी लोगों से घरों में ही रहने की अपील की है। ऐसे में ख्यातिप्राप्त बुजुर्ग चित्रकार जोधईया बाई भी अपनी चित्रकारी के माध्यम से लोगों को कोरोना से बचाव के उपाय के उपाय बता रही है।

जोधईया बाई अपने चित्रों में कोरोना वायरस की भयावहता के साथ, बचाव के अपने पारम्परिक, वैज्ञानिक, आध्यात्मिक एवं प्राकृतिक उपायों को उकेर रही हैं। ग्राम लोढा के जनगण तस्वीरखाना गुरु आशीष स्वामी के सानिध्य में अपने बैगा चित्रकारों के साथ जोधईया बाई अपनी जनजातीय कला के माध्यम से चित्र उकेरकर समाज को कोरोना वायरस के लड़ाई का संदेश दे रही हैं।

जनगण तस्वीरखाना के संचालक और जोधईया बाई के गुरु आशीष स्वामी बताते हैं कि आदिवासी समाज की महामारी से लड़ने के अपने पारंपरिक तौर तरीके रहे हैं, जिसे ये लोग अपने चित्रों में उकेर रहे हैं। चित्रों में देखे तो पेड़ो में घोसले ये बताते हैं कि अपने घरों में रहिए। वहीँ कोरोना महामारी को मकड़ी के जाले की तरह दिखाया गया है, जिसमे महिला पुरुष एवं बच्चे फंसे दिखाई दे रहे हैं। कई चित्रों में अपने आराध्य की शरण मे जाकर पूजा पाठ के भी चित्र बनाये गए हैं। इस प्रकार जनजातीय कलाकार अपने कला से देश को कोरोना वायरस के बचाव का संदेश दे रहे हैं।

कोरोना महामारी से लड़ने और बचाव के लिए बैगा चित्रकार जोधईया बाई एवं उसके समूह द्वारा बनाये गए चित्र न सिर्फ कारगर हैं, बल्कि समाज मे महामारी से बचाव का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक संतुलन प्रकृति के साथ स्थापित करते हैं जो बताता है कि हमारी पुरातन शैली बहुत समृद्ध रही है जिसमे हर मोर्चो से जीतने का माद्दा कूटकूटकर भरा हुआ है।

Written by XT Correspondent

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