May 19, 2026

रायसेन के टिकोदा और आसपास क्षेत्र में मिलते हैं 15 लाख वर्ष पुराने प्रागैतिहासिक प्रमाण

रायसेन। रायसेन जिले के टिकोदा, डाम डोंगरी और इसके आसपास का क्षेत्र लाखों वर्ष पूर्व मानव की गतिविधियों का केन्द्र रहा है। यहां मिले पाषाण उपकरण से इस बात की पुष्टि होती है। खास बात यह है कि इन पाषाण उपकरणों की समानता अफ्रीका से प्राप्त ओल्डवान संस्कृति के उपकरणों से मिलती-जुलती है।

दरअसल दुनिया भर के वैज्ञानिकों और पुरातत्ववेत्ताओं का मानना है कि पृथ्वी पर मानव सभ्यता का विकास अफ्रीका महाद्वीप में हुआ था। इसके बाद मानव पूरे पृथ्वी ग्रह पर आया। लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि रायसेन जिले के टिकोदा और इसके आसपास के क्षेत्रों में 15 लाख वर्ष से अधिक प्राचीन प्रागैतिहासिक प्रमाण मिले हैं।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण नई दिल्ली के सेवानिवृत्त महानिदेशक डॉ एसबी ओता ने इस क्षेत्र में छह सालों तक कराए उत्खनन से कई जानकारियां निकलकर सामने आई है। यहां जो पाषाण उपकरण मिले हैं, वह अफ्रीका से प्राप्त ओल्डवान संस्कृति के उपकरणों से मिलते हैं। इन दोनों क्षेत्रों में प्राचीन मानव के रहन-सहन, खान-पान, अन्य गतिविधियाँ, मिट्टी के नमूनों और पाषाण उपकरणों में समानता है। क्षेत्र में उत्खनन के दौरान शुतुरमुर्ग के अड्डे के टुकड़े भी मिले हैं।

डॉ एसबी ओता के अनुसार यह क्षेत्र लाखों वर्ष पूर्व मानव की गतिविधियों का केन्द्र रहा है। यहां जिस तरह के पाषाण उपकरण मिले है, वह अफ्रीका के ओल्डवान कल्चर से मिलते जुलते है। अफ्रीका का इस कल्चर में प्रागेतिहासिक काल में सबसे प्रारंभिक और व्यापक पुरातत्वीय उपकरण माने गए है।

Written by XT Correspondent

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