छतरपुर। मध्यप्रदेश के छतरपुर में रहने वाले एक मजदूर परिवार को दिल्ली में मकान मालिक ने किराया न चुका पाने पर घर से निकाल दिया। सर से छत छीन गई तो मजदूर को मजबूरन अपने परिवार के साथ जुगाड़ का रिक्शा चलाकर अपने घर आना पड़ा। मजदूर गृहस्थी का पूरा सामान और अपने परिवार को रिक्शे पर बैठकर तेज गर्मी में 600 किलोमीटर रिक्शा चलाकर अपने घर छतरपुर पहुंचा। मजदूर ने इसे अपने जीवन का सबसे बुरा अनुभव बताते हुए कहा कि अब वह कभी अपना गांव छोड़कर नहीं जाएगा।
दरअसल लॉकडाउन के कारण प्रवासी मजदूरों को काम मिलना बंद हो गया है। ऐसे में मजदूर अपने मकान का किराया नहीं चुका पा रहा है। इस कारण मकान मालिकों द्वारा मजदूरों से घर खाली कराए जा रहे हैं। इससे मजदूरों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार मजदूरों की दर्द भरी कहानियां सामने आ रही है। ऐसी ही एक कहानी है छतरपुर जिले के हरपालपुर नगर के मवईया गाँव में रहने वाले प्रवासी मजदूर वृंदावन अहिरवार की।
वृंदावन अपनी पत्नी गीता, तीन बच्चों और भांजे के साथ दिल्ली में रहकर अपने परिवार का गुजर-बसर करता था। लॉकडाउन में मजदूरी मिलना बंद हुआ तो वह अपने मकान का किराया नहीं दे पाया। इस कारण मकान मालिक ने वृंदावन और उसके परिवार को घर से बहार निकाल दिया।
ऐसे में वृंदावन और उसके परिवार के सामने वापस अपने गाँव लौटने के अलावा कोई चारा नहीं बचा। वृंदावन ने जुगाड़ का रिक्शे पर गृहस्थी का पूरा सामान और अपने परिवार को बिठाया और अपने घर के लिए निकल पड़ा। लगातार पांच दिन तक तेज गर्मी में 600 किलोमीटर रिक्शा चलाकर वृंदावन अपने परिवार के साथ अपने गाँव मवईया पहुंचा।
मजदूर परिवार ने बताया कि पांच दिनों के सफर में रास्ते में कहीं खाने-पीने का सामान नहीं मिला। जो रुपया-पैसा था, तो रास्ते में मासूम बच्चों के लिये खाने-पीने का इंतज़ाम किया। रात को जब हरपालपुर पहुँचे तो मजदूर परिवार ने बताया कि यह जीवन का सबसे बुरा अनुभव रहा। अब कभी अपना गांव छोड़कर नहीं जाएँगे। मजदूर के दर्द में सरकारों द्वारा मजदूरों के लिये कुछ नहीं करने की सच्चाई बयान हो रही थी।
