उमरिया। प्रदेश का गाँव आजादी के 72 साल बाद भी बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की राह टाक रहा है। ग्रामीण पगडंडियों, नदी नालों और तीन किमी पहाड़ चढ़कर आवागमन करने पर मजबूर है। बिजली नही होने के कारण ग्रामीण चिमनी के सहारे रात गुजारते हैं। सौ फीसदी गोंड आदिवासी वाले गाँव पर ना कभी विधायक या सांसद ने ध्यान दिया और ना ही प्रशासनिक अधिकारियों ने। हालाँकि अब कलेक्टर ने गांव में चौपाल लगाकर समस्याओं के निदान की बात कही है।
उमरिया जिले के सुदूर डिंडोरी जिले की सीमा पर विंध्य मैकल पर्वत श्रृंखला पर आबाद सेठानी गांव के लोग आज भी आदिम युग की जिन्दगी जीने पर मजबूर है। नाम से लगता है जैसे यह गाँव बड़े-बड़े सेठो का गांव होगा, लेकिन हकीकत इसके ठीक विपरीत है। गाँव में आने-जाने के लिए तीन किमी पहाड़, नदी नालों और पगडंडियों का सफर करना पड़ता है।
आजादी के इतने सालों बाद भी ग्रामीण बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा के ली संघर्ष कर रहे हैं। गाँव में अगर कोई बीमार पड़ जाए तो उसे कंधे पर बैठाकर अस्पताल ले जाया जाता है। गांव में बिजली नही होने से चिमनियों के सहारे रात गुजरती है। गांव में न आंगनबाड़ी केंद्र है, न स्कूल और न स्वास्थ्य सुविधा।
गांव की बदहाली का आलम यह है कि सड़क न होने से बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं। गांव में बच्चे बचपन से ही आजीविका के काम मे जुट जाते हैं। गांव के पार्षद की माने तो उन्होंने गांव में सुविधा मुहैया कराने के लिए कई प्रयास किए लेकिन जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासन की उपेक्षा के कारण गांव में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार नहीं हो सका। बीते दिनों सेठानी गांव की बदहाली की खबर जब जिले के कलेक्टर को पता चली तो उन्होंने जल्द गांव में चौपाल लगाकर ग्रामीणों की हर संभव मदद का भरोसा दिया है। जिला प्रशासन के गांव भ्रमण के दावे से ग्रामीणों में गांव में विकास की आस जगी है देखना है कब पूरी होगी।
बता दे कि लगभग 100 घरों और हजार की आबादी वाला यह गाँव ग्राम पंचायत चंगेरा के अंतर्गत आता है। यह क्षेत्र भाजपा से 9 बार विधायक और सांसद, मंत्री रहे ज्ञान सिंह का गृह ग्राम से लगा हुआ है। वर्तमान में उनके पुत्र शिवनारायण सिंह यहां से भाजपा के विधायक हैं।
