May 19, 2026

लॉकडाउन के कारण फ़ूलों की खेती करने वाले किसान हो रहे परेशान, कई क्विंटल फ़ूल हो रहे ख़राब

आगर-मालवा। लॉकडाउन के कारण मंदिर, शादियों सहित अन्य मांगलिक कार्य बंद हुए तो फूलों की खेती करने वाले किसानो पर संकट आ खड़ा हुआ है। 25 से 30 बीघा खेत में फूल की खेती करने वाले किसान अब परेशान है कि इन फूलों का क्या किया जाए? कोई फूलों को खरीदने के लिए तैयार नहीं है। लिहाजा किसान फूलों को खेतों से निकलकर फेंकने पर मजबूर हैं। इससे किसानों को बड़ा नुकसान हुआ है।

दरअसल आगर मालवा जिले की सैकड़ों बीघा जमीन में फूलों की खेती होती है। यहां का गुलाब और गेंदा पूरे क्षेत्र में मशहूर है। यहां के कई किसान फूलों की खेती पर ही निर्भर है। इन किसानों को फूल बेचने के लिए या तो मंदिरों धर्म स्थलों का सहारा है या फिर कोई सामाजिक या शादी ब्याह के कार्यक्रम। मगर चूँकि अब लॉकडाउन के चलते इन सभी पर ताले लग चुके हैं, ऐसी स्थिति में यह किसान फूलों की बर्बादी के आंसू रो रहे हैं। फूल आम लोगों की जरुरी आवश्यकता की चीज भी नहीं है। इसलिए अब किसान खेतों से फूलों को उखाड़कर फेंक रहे हैं।

फूलों की खेती करने वाले क्षेत्र के किसान हरि बोल भी अपने कई बीघा खेत से फूलों के पौधों को उखाड़कर फेंकने को मजबूर है। उनका परिवार अपनी 30 बीघा जमीन में गुलाब और गेंदा के फूलों की खेती करता है। फूलों की खेती से ही उनके परिवार का भरण-पोषण होता है। लेकिन इस साल लॉकडाउन के कारण अब वह फूलों के पौधों को उखाड़ उखाड़ कर फेंक रहे हैं।

किसान हरि बोल ने बताया कि लॉकडाउन के कारण मंदिर, शादियां और अन्य मांगलिक कार्यक्रमों पर रोक लगा दी गई हैं। ऐसे में अब इन फूलों को कोई खरीद नहीं रहा है। फूल ऐसी चीज भी नहीं जो खाने के काम आती हो या आम लोगों की जरुरी आवश्यकता की चीज में शामिल हो। ऐसे में अब फूल पौधों पर लगे-लगे ही सूखने लगे हैं। इसलिए किसान अपनी कई बीघा की फूलों की खेती को काटकर नष्ट करने में लगे हुए हैं। किसान खेतों से फूलों के पौधों को उखाड़कर कुछ और उपज पैदा करके दो पैसे कमाना चाहता है।

वहीँ क्षेत्र के अन्य किसान रूपा माली का भी यही हाल है। रूपा माली को लगा था कि लॉकडाउन खुलने के बाद फूलों में फिर से बाहर आएगी और यही सोचकर उसने बहुत सारे गुलाब पौधों से तोड़कर इकट्ठा कर लिए। लेकिन लॉकडाउन बढ़ने के कारण हजारो रुपए के गुलाब पड़े पड़े ही सूख गए। उसने जितने गुलाब इकट्ठे किए थे वह सब तिनके की तरह सूख कर कड़क हो गए। सूखे गुलाब देखकर अब रूपा माली खून के आंसू रोने पर मजबूर है।

यही हाल क्षेत्र के अन्य किसानों का भी है। क्षेत्र में हजारो बीघा जमीन पर गुलाब, गेंदा और गुलतेवड़ी की खेती होती है। किसानों का कहना है कि हमारे यहां से फूल उज्जैन, भोपाल, इंदौर, झालावाड़, पाटन जाते हैं। शादी और ब्याह में भी सप्लाई होते है। अब लाखो रुपये की खेती बर्बाद हो रही है, अब हम करे भी तो क्या करे।

Written by XT Correspondent

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