शिवपुरी। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस का हाथ छोड़कर भाजपा का कमल थाम लिया है। इसका सबसे ज्यादा असर ग्वालियर संभाग की राजनीति पर देखने को मिल रहा है। सिंधिया के इस्तीफे के बाद उनके समर्थक नेताओं ने भी कांग्रेस कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। हालाँकि इससे ग्वालियर संभाग के भाजपा और सिंधिया समर्थक नेता असमंजस में भी दिखाई दे रहे हैं।
दरअसल सिंधिया समर्थक नेता लंबे समय से उनके नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी का झंडा उठा रहे थे। वह जमकर भाजपा की आलोचना करते थे। ऐसे में उनके सामने अब संकट खड़ा हो गया हैं कि वह खुद को भाजपा में कैसे एडजस्ट कर पाएंगे। ग्वालियर संभाग में भाजपा के पास पहले से ही नेताओं की फ़ौज हैं। खासकर उन नेताओं के साथ मिलकर कैसे काम किया जाएगा जिनसे वह वर्षों से वैचारिक रूप से लड़ रहे हैं। सिंधिया के कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद कई कांग्रेसी नेताओं ने भी इस्तीफा तो दे दिया है, लेकिन उन्हें अब अपने भविष्य की चिंता सता रही है।
वहीँ अगर भाजपा की बात करें तो वहां भी असमंजस का माहौल है। भाजपा के वह नेता सबसे ज्यादा दुविधा में हैं जो महल के विरोधी हैं और सालों से सिंधिया विरोधी राजनीति करते हुए आ रहे हैं। ऐसे में अब इन नेताओं के बीच संकट है कि यहां पर कैसे इस राजनीति में एडजस्टमेंट किया जाए। इसके अलावा भाजपा के वह नेता जो बीते साल विधानसभा चुनाव हारे, वह सिंधिया समर्थक कांग्रेस नेताओं से ही चुनाव हारे हैं अब आगे उनके टिकट का क्या होगा?
हालाँकि सिंधिया के भाजपा में आने से भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के वह नेता खुश हैं जो महल समर्थक माने जाते हैं। पूरे सिंधिया परिवार के एक ही दल में आने से वह खुश है। अब शिवपुरी की ही बात की जाए तो यहां पर यशोधरा समर्थक कई भाजपा नेताओं ने ज्योतिरादित्य सिंधिया का भाजपा में आने का स्वागत किया है क्यों कि अब भाजपा में महल का वर्चस्व और बढ़ गया है। इससे उन्हें फायदा मिलेगा।
कई कांग्रेसियों ने नहीं छोड़ी पार्टी-
ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा कांग्रेस छोड़े जाने के बाद इस अंचल के कई कांग्रेस नेता जैसे पिछोर विधायक केपी सिंह, पूर्व विधायक हरिबल्लभ शुक्ला, पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष श्रीप्रकाश शर्मा, पूर्व जिलाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण धाकड़, जिला उपाध्यक्ष बासित अली सहित कई ऐसे नेता हैं जिन्होंने कांग्रेस नहीं छोड़ी है। इन कांग्रेसियों में दिग्गी समर्थक नेताओं की संख्या ज्यादा है। अभी आने वाले समय में और पता चलेगा कि सिंधिया समर्थक कितने नेता कांग्रेस छोड़ते हैं। आने वाले समय में यहां पर नए राजनीतिक समीकरण बनेंगे।
