नीमच। अमेरिका और ईरान के बीच जारी विवाद का असर देश की दवा कंपनियों पर देखा जा रहा है। इन देशों के बीच विवाद के चलते कोडिन फॉस्फेट का आयात भी अटक गया है। कोडिन फॉस्फेट का उपयोग खाँसी एवं अन्य सर्दजन्य बीमारियों के उपचार हेतु बनने वाली औषधियों में किया जाता है। कोडिन फॉस्फेट की कमी से देश की फार्मास्यूटिकल कंपनियां परेशान है। वहीँ सर्दी का मौसम शुरू हो चुका है और पर्याप्त मात्र में दवाई नहीं बनने से देश में औषधी संकट की स्थिति बन सकती है।
दरअसल सरकार के नीमच (मप्र) और गाजीपुर (उप्र) स्थित अल्कालॉयड प्लांट में अफीम को प्रोसेस कर विभिन्न जीवन रक्षक तथा दर्द निवारक औषधियों के निर्माण में प्रयुक्त होने वाले कई ड्रग्स बनाएं जाते है। इनमे कोडिन फॉस्फेट मुख्य है। कोडिन फॉस्फेट का उपयोग खाँसी और अन्य रोगों में उपचार में काम आने वाली कफ सीरप व दवा निर्माण में मुख्य रूप से किया जाता है।
साल 2019-20 में देश में लगभग 40 मैट्रिक टन कोडिन फॉस्फेट की जरूरत का आंकलन किया गया था। नीमच तथा गाजीपुर अल्कालॉयड प्लांट में करीबन 20 टन उत्पादन ही अपेक्षित था।
इसको देखते हुए ईरान की टी मेड़ एण्ड कम्पनी से 20 टन कोडिन फॉस्फेट आयात का अनुबंध किया था। इसको लेकर सभी औपचारिकताएं भी पूर्ण की जा चुकी है। ईरान से कोडिन फॉस्फेट को नीमच प्लांट में मंगवाया जाना था। कोडिन की सर्वाधिक जरूरत सर्द के सीजन से शुरूआत के ऐन पहले ही होती है। क्योकि इससे बनने वाले सीरप व दवाईयों की भारी मांग देश भर में सर्द के दौरान होती है।
इस बीच अमेरिका एवं ईरान के बीच विवाद के कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान से व्यापार करने वाले देशों को अमेरिका का दुश्मन मानने की चेतावनी दी है। हालाँकि भारत सरकार ने प्रत्यक्ष तौर पर तो अमेरिका की चेतावनी को लेकर कोई रुख नहीं बदला है, लेकिन परोक्ष रूप से ईरान से जुडे मामलों में ठण्डा रूख भी अपना लिया है। इस कारण ईरान से आने वाला कोडिन फॉस्फेट आयात का मामला अधर में अटक गया हैं।
फैक्ट्रियों के मुख्य नियंत्रक ने इस बारे में केंद्रीय राजस्व, विदेश तथा कानून मंत्रालय से मार्गदर्शन हेतु लिखा है किंतु वहां से कोई सक्रियता नहीं दिख रहीं है। 20 टन कोडिन फॉस्फेट आयात अटकने से अभी आलम यह है कि नीमच तथा गाजीपुर प्लांट में जितना भी यह ड्रग्ज बनता है हाथो-हाथ उठा लिया जाता है तथा स्टॉक शून्य है।
देश की सर्दजन्य रोगों के उपचार हेतु दवाईयॉ बनाने वाली सभी कम्पनियां सर्द शुरू हो जाने के बाद भी संभावित मात्रा में कफ सीरप व अन्य दवाईयां नहीं बना पा रहीं है। जानकारों का कहना है कि इस बारे में अगर जल्दी ही समाधान नहीं किया गया तो रोगों से पीडित लोगों को दवाईयां उपलब्ध करवाने में परेशानी हो सकती है।
