मेघनगर। लॉकडाउन में फंसे मजदूरों को श्रमिक स्पेशल ट्रेन से झाबुआ के मेघनगर स्टेशन लाया गया, लेकिन यहाँ स्थानीय प्रशासन की बड़ी लापरवाही देखने को मिली। प्रशासन ने मजदूरों के लिए पानी की कोई व्यवस्था नहीं की। भरी गर्मी में दो घंटे गुजर जाने के बाद भी मजदूरों को पानी नहीं मिला और आखिर में उन्हें प्यासा ही बसों में बैठाकर अपने गृह जिलों की तरफ रवाना कर दिया गया।
दरअसल प्रदेश सरकार भले ही मजदूरों को उनके हर पहुँचाने के लिए सभी जरुरी इंतजाम करने की बात कही रही हो, लेकिन धरातल पर तस्वीर अलग नजर आ रही है। इसकी एक झलक झाबुआ जिले के मेघनगर स्टेशन पर देखने को मिली। यहाँ स्थानीय प्रशासन ने श्रमिक स्पेशल ट्रेन से पहुंचे मजदूरों के लिए पानी की कोई व्यवस्था नहीं की। नन्हे-मुन्ने बच्चे भी पानी की एक एक बूंद को तरसते नजर आए।
भरी गर्मी में प्यास को को लेकर मजदूरों की मुसीबत साफ बयां हो रही थी, लेकिन स्थानीय प्रशाशन की नींद नही खुली। इस दौरान मजदूर पीने के पानी की खाली बोतले लेकर पानी के लिए इधर उधर भटकते नजर आए। पानी की चाह में मजदूर नगर परिषद द्वारा लगाए गए पानी के नलों को खोलते हैं और बंद करते हैं, लेकिन उनमें से पानी की एक बूंद भी मजदूरों को नसीब नहीं होती।
एक ओर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज श्रमिको को उनके घर तक पहुंचाने के लिए माकूल व्यवस्था करने की बात कह रहे है ताकि श्रमिको को किसी बात की परेशानी न हों। मगर स्थानीय प्रशासन लगातार लापरवाही कर देश के प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के मंसूबों पर पानी फेर रही है। यही वजह है कि इन श्रमिकों भरी गर्मी में श्रमिक ट्रेन से उतरने के बाद पीने का पानी भी नसीब नहीं हुआ। कई श्रमिक बस में बैठे प्यासे कंठे के साथ पानी की खाली बोतले दिखा कर अधिकारियों से पानी मांगते नजर आए। मगर इन श्रमिकों को बिना पानी उपलब्ध कराए बसों को उनके ग्रह जिलों की ओर रवाना कर दिया गया।
जब इस मामले को लेकर मीडिया ने स्थानीय जिम्मेदार प्रसाशक एसडीएम पराग जैन से श्रमिको के जल संकट की जानकारी चाही तो इस मामले में कुछ कहने की बजाय पल्ला झाड़ते व कैमरे के सामने कुछ बोलने को तैयार नही हुए।
