बड़वानी। आमतौर पर आधा घंटा या एक घंटा खड़ा रहने पर ही हमारे पैरों में दर्द होने लगता है। लेकिन एक साधु ऐसा भी है जो पिछले 13 वर्षों से जमीन पर नहीं बैठे है। सोने के लिए साधु झूले का सहारा लेते है। पिछले कई सालों से इन्होने अन्न का भी त्याग किया हुआ है। वह सिर्फ फल ही खाते है।
पिछले 13 वर्षों से खड़े रहने वाले साधु का नाम है बाबा नारायण। बाबा नेमावर से पांच माह की पैदल यात्रा पर निकले है और मंगलवार को बड़वानी पंहुचे। बाबा नारायण न जमीन पर बैठते है, न जमीन पर सोते है। वह बस यूं ही खड़े रहते है। पिछले 13 सालों से यही उनकी दिनचर्या रही है।
बाबा का कहना है कि उन्होंने किसी प्रतिज्ञा के लिए नहीं बल्कि आमजन की भलाई के लिए त्याग किया है। पैदल यात्रा के बाद थके बाबा सोने के लिए झूले का सहारा लेते है और खड़े-खड़े ही सो जाते है।
बाबा से पिछले 4 वर्षों से जुड़े उनके सेवक भजन बताते है के वो बाबा के साथ ही रहते है और उनकी सेवा करते है। जब से वे बाबा से जुड़े है बाबा को बस यूं ही देखते आ रहे है। यही नही बाबा ने अन्न का भी त्याग कर रखा है सिर्फ फल-फूल के सहारे ही दिन निकलता है।
