कटनी। कोरोना संकट के कारण लबों की शान कहे जाने वाले पान की फसल बर्बाद हो रही है। लॉकडाउन के कारण पान का व्यापर बंद होने से पान उत्पादकों के सामने रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई है। वहीँ पान के पत्तों की तुड़ाई नहीं होने से बरेजों में लगी फसल बर्बाद हो रही है।
दरअसल लॉकडाउन के कारण पान का व्यापार बिल्कुल ठप हो गया है। जो पान साढ़े तीन रुपये का एक पत्ता बिकता था अब उसे कोई पचास पैसे में भी नही पूछ रहा है। यही कारण है कि मध्यप्रदेश के कटनी जिले का मशहूर बंगला पान बरेजों में ही चौपट हो रहा है। यहां पान की खड़ी फसल पूरी तरह तैयार हो गई हैं, लेकिन बिक्री नहीं होने से बरेजों में लगी पान की फसल बर्बाद हो रही है।
बता दे कि कटनी जिले के बिलहरी और पान उमरिया का पान मध्य प्रदेश के कई जिलों लेकर नवाबों के शहर लखनऊ तक जाता है। यहां के सैकड़ों परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी बड़े पैमाने पर बरेजा लगाकर पान की खेती करते आ रहे हैं। बरेजा लगाने वाले ये परिवार पूरी तरह पान की फसल पर निर्भर रहते हैं। लेकिन इस बार किसान की आँखों के सामने फसल बर्बाद हो रही है।
लॉकडाउन के चलते पान की दुकानें बंद होने और बाहर सप्लाई न हो पाने के कारण पान को लेने वाला कोई नही है। जो पान साढ़े तीन रुपये का एक पत्ता बिकता था अब उसे कोई पचास पैसे में भी नही पूंछ रहा है। लबों की शान पान व्यवसाय कोरोना महामारी की भेंट चढ़ चुका है।
लॉकडॉउन के कारण हरेक व्यवसाय प्रभावित रहा है। उनमें से आज बहुत से व्यवसाय को छूट भी मिल गई, लेकिन पान व्यवसाय आज भी उसकी मार झेल रहा है। बरेजे लगाकर पान की खेती करने वाले किसान लाखों रुपये की लागत लगाकर इसका उत्पादन करते हैं। फसल आने के बाद अब इन किसानों को कुछ हासिल नही हो पा रहा है। किसानों के पास जो कुछ था वो बरेजे में लगा दिया। अब उनके पास परिवार पालने के लाले पड़े है। वही कई लोग ऐसा भी मिले जिन्हें इस साल लड़कियों की शादी करनी थी लेकिन सब धरा का धरा रह गया।
