उमरिया। पुलिसकर्मी, जेल प्रहरियों और कैदियों के बीच अब तक पिटाई करते या अमानवीय बरताव करने की कई कहानियां सुनी होगी लेकिन जेल के एक आरक्षक ने अपनी ड्यूटी से हटकर एक ऐसा काम किया जो नज़ीर बन गया है। जेल के इस आरक्षक ने कैदी को अपना खून देकर उसकी जान बचाई। डॉक्टर्स ने कैदी की तबियत खराब होने और ऑपरेशन के लिए खून चढाने की सलाह दी थी।
दरअसल जिला जेल उमरिया में विचाराधीन कैदी दीपक महार एनडीपीसी एक्ट में प्रतिबंधात्मक दवाओं के व्यापार में लिप्त पाए जाने के आरोप में जेल में बंद है। बीते कई दिनों से उसके स्वास्थ्य में गिरावट देखी जा रही थी। न्यायालय के आदेश पर उसे जिला चिकित्सालय में इलाज हेतु भर्ती कराया गया था। शुरुआती परीक्षण के बाद डॉक्टरों ने दीपक को हर्निया की गंभीर बीमारी से ग्रस्त बताया।
डॉक्टरों ने दीपक में खून की कमी बताते हुए उसका ऑपरेशन करने से इंकार कर दिया था। इस पर जेल में कार्यरत आरक्षक शरीब असरफी ने दीपक को ब्लड दान करने का मन बनाया। आरक्षक पुलिस की वर्दी में ही जिला चिकित्सालय पहुंचा और कैदी के लिए रक्तदान किया। आरक्षक के रक्तदान करने से कैदी का ऑपरेशन संभव हुआ और उसकी जान बचाई जा सकी है।
आरक्षक शरीब अशरफी के रक्तदान करने से जहां समाज मे पुलिस की नकारात्मक छवि में बदलाव लाकर कम्यूनिटी पुलिसिंग के प्रयास को बढ़ावा दिया है। वहीं कैदी दीपक के मानसिक विचारों में काफी बदलाव आया है। समाज कल्याण की भावना को देखते हुए कैदी ने भी दोबारा किसी भी तरह के अपराध में संलिप्त नही होने का मंसूबा बना लिया है।
