May 4, 2026

देवास के मुंडला गांव के युवा ने थाईलैंड के पटाया में फहराया परचम

देवास देवास के मुंडला गांव के युवा राजकुमार परिहार ने थाईलैंड के पटाया में देश के लिए एशियाई नौकायान में गोल्ड मेडल जीता है। राजकुमार ने थाईलैंड के पटाया शहर में चार किलोमीटर की तटीय नौकायन एशियन चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व कर इस एशियाई प्रतियोगिता में पहला स्वर्ण पदक जीतकर गांव का ही नहीं देश का नाम भी रोशन किया है। इतना ही नहीं राजकुमार ने विदेश में 15 एशियाई देशों से हिस्सा लेने आए सभी देशों के प्रतिभागियों को पीछे छोड़ तिरंगा फहराया। पटाया में 20 से 22 सितंबर के बीच हुई एशियन कोस्टल रोइंग चैंपियनशिप में चप्पू चलाकर आर्मी की टीम के लिए राजकुमार ने गोल्ड मेडल दिलाया है। राजकुमार इस पांच सदस्य टीम में मध्यप्रदेश के एकमात्र खिलाड़ी हैं। इसके अलावा पुणे स्थित इस आर्मी रोइंग रोड में प्रशिक्षण ले रहे 80 फौजियों में से मध्यप्रदेश से राजकुमार इकलौते हैं। पुणे की आर्मी रोइंग रोड की इस टीम का कंपटीशन जापान, इंडोनेशिया, बहरीन, कुवैत और भारत की टीम से था जिसमें टीम प्रथम रही और गोल्ड मेडल जीता।

संघर्ष से पाया मुकाम

परिवारजनों ने बताया है कि राजकुमार ने वर्ष 2015 में पहली बार मंदसौर में हुई आर्मी की भर्ती में भाग लिया लेकिन सिलेक्शन नहीं हो पाया। इसी साल देवास में आर्मी की भर्ती कुशाभाऊ ठाकरे स्टेडियम में हुई। इसके बाद राजकुमार फिटनेस और परीक्षा देकर आर्मी में भर्ती हुआ। एक वर्ष सेना का प्रशिक्षण लेकर ब्रिगेड ऑफ गार्ड (कारगिल युद्ध अभूतपूर्व सहयोग के बाद विशेष सम्मान प्राप्त सेना) 17वीं गार्ड बीकानेर में चयनित किया गया। इसके बाद राजकुमार ने वरिष्ठ अधिकारियों को नौकायान के संबंध में प्रशिक्षण लेने की बात रखी। इसके बाद राजकुमार को भोपाल ईएमई सेंटर में नौकायन की तैयारी के लिए भेजा गया। 2018 में आर्मी नौकायान में आयोजित अंतरदेशीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतकर आर्मी रोइंग नोड पुणे (देश के खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने वाली आर्मी की अंतरराष्ट्रीय संस्था) में अपना स्थान सुनिश्चित किया।

पहली बार में ही जीता स्वर्ण पदक

देश में इस खेल (तटीय नौकायान) में यह पहला मेडल है। अंतरराष्ट्रीय स्तर में देश को स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ है। चार किलोमीटर लंबी इस नौकायान प्रतियोगिता में देश के पांच खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया, जिन्होंने एक टीम की तरह काम कर देश को स्वर्ण पदक दिलाया। आर्मी रोइंग नोड पुणे के विभिन्न प्रशिक्षकों द्वारा इनको प्रशिक्षित किया गया।

ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतना लक्ष्य

राजकुमार ने मध्यमवर्गीय परिवार में रहकर बचपन से आठवीं तक अपने गांव मुंडलाआना में ही शिक्षा प्राप्त की। घर में पिता अजाबसिंह कृषक है और माता पपीता बाई गृहिणी और अपने पति का खेती किसानी में सहयोग करती हैं। राजकुमार का कहना है कि देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना उनका लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि अभी तक तटीय नौकायान प्रतियोगिता में भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व एशियन तटीय नौकायान में कोई स्वर्ण पदक नहीं मिला है, लेकिन आर्मी रोइंग नोड पुणे में मिले प्रशिक्षण से मैं और मेरे चार अन्य साथियों का भी योगदान रहा है। अब ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना हमारा लक्ष्य है।

Written by XT Correspondent

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