ग्वालियर। कोरोना संकट में लोगों ने भले ही सामान्य चिकन से तौबा कर लिया हो लेकिन इस दौरान कड़कनाथ चिकन की बिक्री 14 गुना तक बढ़ गई है। लॉकडाउन से पहले जहां ढाई महीने में 400 मुर्गे बिकते थे, जबकि लॉकडाउन के दौरान ढाई महीने में 5600 कड़कनाथ मुर्गे बेचे गए हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों का कहना है कि कड़कनाथ मुर्गा औषधीय गुणों से युक्त होता है। इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा होती है। इससे कड़कनाथ कोरोना से संक्रमित नहीं हो सकता है, जबकि सामान्य मुर्गे संक्रमित हो सकते हैं। यही कारण है कि कड़कनाथ मुर्गे की बिक्री में उछाल आ गया है। इसके अलावा कड़कनाथ मुर्गे से रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है।
बता दे कि मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले में तीन साल पहले कड़कनाथ मुर्गो की ब्रीडिंग शुरू हुई थी। कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से लोगों को मुर्गे और चूजे दिए गए थे। आज कृषि विज्ञान केंद्र से 90 मुर्गी पालक जुड़े हुए हैं जो कड़कनाथ मुर्गे का पालन करते हैं और बेचते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र से भी इनकी बिक्री की जाती है।
गौरतलब है कि कड़कनाथ मुर्गे को औषधीयगुणों से युक्त माना जाता है। अन्य मुर्गों की तुलना में कड़कनाथ मुर्गे में ज्यादा प्रोटीन होता है। साथ ही अन्य नस्लों के मुर्गों की तुलना में कड़कनाथ में बहुत ही कम वसा पाया जाता है। वहीं कोलेस्ट्रॉल भी कम पाया जाता है। इनके अलावा कड़कनाथ में विटामिन बी-1, बी-2, बी-6, बी-12, सी व ई भी अधिक पाया जाता है।
