इंदौर। कोरोना संकट के कारण 250 साल पुराने महेश्वरी साड़ी उद्योग पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। महानगरों से साड़ियों के आर्डर रद्द हो गए हैं। इस कारण 2000 से ज्यादा बुनकरों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। कई बुनकर अब तक पलायन कर गए हैं।
गौरतलब है कि इंदौर के होलकर राजघराने की महामारी देवी अहिल्याबाई ने अपनी राजधानी महेश्वर में इस उद्योग की नींव रखी थी। उन्होंने देश के अलग-अलग स्थानों से हुनरमंद बुनकरों को महेश्वर में लाकर उन्हें प्रोत्साहित किया। पिछले 250 वर्षों में महेश्वरी साड़ी उद्योग ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन कोरोना संकट के कारण आज यह अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है।
कोरोना संकट ने महेश्वर में 24 घंटे आने वाली उद्योग की आवाज पर ब्रेक लगा दिया है। महानगरों से साड़ियों के आर्डर रद्द हो गए हैं। इस कारण लाखों रुपए का माल बनकर तैयार पड़ा हुआ है। विश्वास पर व्यापार चलने के कारण कोई लिखित समझौता भी नहीं होता हैं, ऐसे में अब तैयार माल को कोई लेने के लिए तैयार नहीं है।
महेश्वरी साड़ी उद्योग पर लगी लगाम के कारण 2000 से ज्यादा बुनकरों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। कई बुनकर अब तक पलायन कर गए हैं। महेश्वर के आधी से ज्यादा आबादी इसी उद्योग से जुडी हैं, इस कारण इन दिनों सभी परेशान हो रहे हैं।
बता दे कि शुरुआत में देवी अहिल्या द्वारा इन साड़ियों को सोने-चांदी के तारों का प्रयोग कर तैयार करवाया जाता था। इन साड़ियों को तीज-त्यौहार पर अन्य रियासतों के राज-परिवार की महिलाओं को भेंट किया जाता था। समय के साथ सूत और सिल्क के प्रयोग से इसे आम आदमी के लिए बनाया गया। आज महेश्वरी साड़ी पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। इसे जीआई टैग भी मिला हुआ है।
