देवास। अब जल्द ही देवास जिले में भी शक्कर से 300 गुना ज्यादा मीठी हर्बल औषधि स्टेविया की खेती की जाएगी। इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल पंजीयन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पंजीयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उद्यानिकी विभाग किसानों को स्टीविया की खेती की आवश्यक प्रकिया बताएगी।
उद्यान विभाग जिला देवास के उप संचालक नीरज सांवलिया ने बताया कि स्टेविया की सूखी पत्ती का भाव नीमच-मंदसौर औषधीय मंडी में 70 से 80 रुपए है। स्टेविया के प्रति स्वस्थ पौधे से 200 से 250 ग्राम उत्पादन होता है। इसका एक साल में चार बार कटाव किया जा सकता है। जल्द ही इसकी यूनिट जबलपुर में तैयार हो रही है। उत्पादन करने वाले किसानों से वर्तमान क्रय विक्रय मूल्य के आधार पर खरीदी भी की जाएगी।
बागली उद्यानिकी विभाग से जुड़े विकास खंड अधिकारी राकेश सोलंकी ने बताया कि वर्ष भर पानी रहने वाली स्थिति में इस फसल का बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है। एक बार लगाने के बाद 3 वर्ष तक इसकी प्रति 3 माह में कटाई की जा सकती है और उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। पौधे लगाने की दूरी 40 से 50 सेंटीमीटर रहती है। प्रति पौधा 60 से 70 सेंटीमीटर ऊंचा होकर बहू शाखा वाला रहता है।
पूर्व कृषि विस्तार अधिकारी सुरेंद्र सिंह उदावत ने बताया कि प्रत्येक परिवार में शुगर की बीमारी वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में कुछ हिस्से में इसकी खेती की जाए तो यह औषधि घर परिवार में उपयोग के साथ आर्थिक संबल प्रदान करेगी।
