उमरिया। उमरिया जिले में एक जगह ऐसी भी है जिसे प्राचीन कालीन मूर्तियों का कारखाना भी कहा जाता है। यह पूरा क्षेत्र अनमोल व अद्भुत कला के नमूनों से पटा पड़ा है। यहाँ जरा सी खुदाई करने पर ही जमीन से मूर्तियाँ निकल जाती हैं।
आपने अभी तक मूर्तियों बनाने के कारखाने और जमीन से मूर्ति मिलने की खबर तो सुनी होगी, लेकिन उमरिया जिले का एक गाँव पथरहठा में जमीन के भीतर मूर्तियों का भंडार है। जिले की पवित्र नदी सोन और छोटी महानदी के त्रिकोण पर स्थित पथरहठा गांव में जगह-जगह मूर्तियाँ रखी हुई है। यह सभी मूर्तियाँ क्षेत्र की जमीन से खुदाई के दौरान निकली है।
गांव के बुजुर्ग मानते है कि पथरहठा गांव में मूर्तियों के निकलने का सिलसिला सालों से चला आ रहा है। यहाँ जरा सी खुदाई में ही मूर्तियाँ निकल आती है। यहाँ हिन्दू देवी-देवताओं के साथ जैन और बौद्ध से जुड़ी प्रतिमाएं, स्तम्भ व शिलालेख भी मिलते हैं। इससे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्राचीनकाल में यहाँ मूर्ति का निर्माण केंद्र या मूर्ति का कारखाना रहा होगा। जमीन में छिपे प्राचीन कलाकृतियों पर स्थानीय लोगो के मत अलग अलग है और लोग अपने अपने अनुभव के आधार पर अनुमान लगाते है।
जिले के जानकर प्राचीन संस्कृति को अमूल्य धरोहर मानते है और इसे संग्रहालय के रूप में विकसित कर पर्यटन से जोड़ने की सलाह देते है। जबकि सामाजिक कार्यकर्ता संतोष द्विवेदी इस प्राकृतिक धरोहर को जांचने और समझने की जरूरत पर बल देते हुए शिलालेखों के अध्ययन की बात करते है जिससे ऐतिहासिक महत्व का पता चल सके।
बहरहाल जिले के कलेक्टर ने जानकारी होते ही पुरातत्व विभाग को पत्र के जरिये इस ऐतिहासिक स्थल की सूचना भेजी है साथ ही इलाके में पर्यटन की संभावना तलाशने पर भी काम शुरू किया गया है।
गौरतलब है कि पथरहठा का पूरा क्षेत्र पथरीला है, यही वजह है कि बुजुर्ग इसे पथरीगढ़ के नाम से भी जोड़कर देखते है। फ़िलहाल जरूरत है मूर्तियों के इस खजाने के पुरातात्विक महत्व को समझने की, जिससे न सिर्फ इस ऐतिहासिक स्थल का इतिहास सामने होगा बल्कि मूर्तियों के खजाने का राज भी खुल जायेगा।
