बुंदेलखंड। प्रदेश के एक जिला अस्पताल में महिला का जंज़ीरों से बांधकर इलाज किया जा रहा हैं। महिला का बरामदे में जमीन पर ही ईलाज किया जा रहा है। उसे पलंग सहित और अन्य सुविधाओं से भी वंचित रखा गया है। अस्पताल कर्मचारी का कहना है कि महिला अपना मानसिक संतुलन खो चुकी है इसलिए बांधकर रखा जाता है।
तांत्रिक-बाबाओं के आश्रम में इलाज के नाम पर लोगों को जंज़ीरों से बांधने की खबर तो हम सब ने देखी और सुनी है लेकिन अस्पताल में महिला को जंज़ीरों से बांधने का मामला बुंदेलखंड जिला अस्पताल का है। जिले के सरवई थाना क्षेत्र की गोयरा गांव में रहने वाली 45 वर्षीय महिला का नाम रानू शुक्ला है। रानू शुक्ला का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। उसे सिर्फ नित्य क्रिया के दौरान ही जंजीरों से मुक्त किया जाता है।
परिजनों और स्टाफ का कहना है कि अगर उसे बांधकर कर नहीं रखेंगे तो वह यहां-वहां भाग जाती और हंगामा करती है। इससे अन्य मरीजों सहित स्टाफ को परेशानी होती है। इसलिए उसे जंजीरों की मदद से अस्पताल में लगी रेलिंग के पोल से बांधकर रखा जाता है।
महिला के वृध्द पिता का कहना है कि उनकी बेटी की शादी पास के ही गाँव में रहने वाले ईश्वरदयाल से हुई थी। महिला ने दो बच्चों को जन्म भी दिया था। लेकिन ससुराल में संकुचित मानसिकता, पर्दा प्रथा और चार दिवारी से बाहर ना निकल पाने के चलते वह डिप्रेसन में चली गई और अपना संतुलन खो बैठी। इस पर उसके ससुराल वाले इसे हमारे पास छोड़ गए। वह अब इसे रखने को तैयार नहीं है। तब से यह हमारे साथ गांव में ही रहती है।
महिला के पिता ने बताया कि इस बार इसका हाथ टूट गया था। हम गरीबी के चलते इसका इलाज नहीं करा पाए। कुछ दिनों में हाथ टेढ़ा-मेढ़ा ही जुड़ गया। उसी हाथ में अब ज़ंज़ीर बंधी हुई है। दूसरे हाथ में जख्म हो जाने के चलते कीड़े लग गए थे। जब रानू को जिला अस्पताल लाए तो इन्फेक्शन होने के कारण डॉक्टर ने उसका हाथ काट दिया। हमारी गरीबी हमारे लिए अभिशाप बनी हुई है। हम ईसका आगे ईलाज नहीं करा पा रहे है। हमारे पास मेंटल हॉस्पिटल जाने के लिए पैसे और संसाधन नहीं है।
