एक्सपोज़ टुडे, उज्जैन। बुजुर्ग आँखें दरवाज़े पर आहट होते ही देखती है कोई हमसे मिलने आया है। आने वाले को देख चेहरे पर चमक और मुस्कुराहट आ जाती है। उज्जैन से क़रीब 15 किलोमीटर दूर अंबोदिया गाँव में बने सेवाधाम आश्रम है। आश्रम में ख़ुशी का महौल है क्योंकि उन्हे एक बेटी मिल गई है, जिससे सारे बुजुर्गों ने दिनभर अपने सुख दुख बाँटे। किसी ने रामायण की चौराई सुना दी तो किसी ने पुराना गाने सुनाए। अपनी परेशानी बता कर मदद भी माँगी। दरअसल यह बेटी है उज्जैन सीएसपी कोतवाली पल्लवी शुक्ला। वे कोरोना और लॉकडाउन के दौरान बुजुर्गों का हाल चाल जानने आश्रम पहुँची।
यहाँ मध्यप्रदेश पुलिस और उज्जैन पुलिस का संवेदनशील चेहरा नज़र आया
आमतौर पर पुलिस को लेकर यह माना जाता है कि सख़्त छवी या बिना फ़ायदे के पुलिस कोई काम नहीं करती। इस इमेज को ग़लत साबित करते हुए सीएसपी शुक्ला ने बुजुर्गों के साथ बैठकर न केवल उनकी बातें सुनी बल्कि पुलिस की तरफ़ से हर संभव मदद का वादा करते हुए अपना नंबर देकर कहा आपके यहाँ बच्चे नहीं हैं लेकिन आपकी बेटी है जिसे आप 24 घंटे में कभी भी याद कर सकते हैं।
सीएसपी शुक्ला ने बताया पुलिसिंग में कम्यूनिटी पुलिसिंग का महत्व है
कई लोग हैं जिन्हें अपनों का इंतज़ार है। कई लोगों के दिल में अपनों से बिछड़ने का दर्द है। कई ऐसे हैं जिन्हें अपनों ने ही धोखा दिया है। हम इन लोगों की हर संभव मदद करेंगे।
