झाबुआ। सरकार की मनरेगा, कपिलधारा और अन्य योजनाओं का असर झाबुआ में साफ दिखाई दे रहा है। लॉकडाउन-3 में मजदूरों को 100 दिन का काम उपलब्ध कराया गया है। शनिवार तक के आंकड़ों के अनुसार ई-मस्टर रोल में दर्ज संभावित कार्यशील मज़दूरों की संख्या 60 हजार के लगभग दर्ज की गई है। वहीँ रोजगार मिलने से मजदूर भी काफी खुश है। उनका कहना है कि वे अब अन्य राज्यों में मजदूरी के लिए पलायन नही करेंगे।
मध्य प्रदेश सरकार ने महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत पूरे देश में सबसे अधिक मजदूरों को काम देने का दावा किया है। मध्य प्रदेश के झाबुआ में मनरेगा सहित कपिलधारा और अन्य योजनाओं का असर दिखाई देने लगा है। लॉकडाउन-3 में यहाँ मनरेगा योजना में हर हाथों में काम के तहत शनिवार तक के आंकड़ों के अनुसार ई-मस्टर रोल में दर्ज संभावित कार्यशील मज़दूरों की संख्या 60 हजार के लगभग दर्ज की गई है। झाबुआ जिले के मज़दूरो को 190 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 100 दिनों का कार्य मनरेगा, कपिलधारा एवं अन्य योजना के तहत दिया गया है। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का ख़ास ध्यान रखा जा रहा है।
दरअसल कोरोना संकट के बीच लॉकडाउन-3 में 20 अप्रैल से रोजगार गारंटी का काम शुरू हुआ है। इसके बाद से ही ग्रामीण क्षेत्रों में काम ज़ोरों पर है। कहीं तालाब खुद रहे हैं तो कहीं तालाबों को गहरा करने का काम चल रहा है। कहीं खेतों का सुधार हो रहा है तो कहीं लोग सड़कों के काम में लोग जुटे हुए है। अब हर हाथों में कार्य मिलने के बाद मजदूरों का कहना कि इसी तरह काम मिलता रहा तो वह मजदूरी के लिए पलायन नही करेंगे। मजदूरों ने काम मिलने की ख़ुशी व्यक्त करते हुए सरकार का धन्यवाद किया।
