May 4, 2026

दो सालों से रोजी-रोटी के लिए श्रमिकों की लड़ाई जारी, सेंचुरी मिल के बाहर दिन-रात डेरा

खरगोन। खरगोन जिले के इंदौर- मुंबई हाइवे पर स्थित सेंचुरी यार्न डेनिम मिल्स के एक हजार श्रमिकों और कर्मचारियों के सत्याग्रह के दो साल पूरे हो चुके हैं। लेकिन किसी भी सरकार ने उनकी रोजी-रोटी के लिए कोई बात तक नहीं है। दो साल पूरे होने पर यहां बड़ा ‘श्रमिक मेला लगा। इसमें दिल्ली, इंदौर, मुंबई, पीथमपुर के श्रमसंगठनों के लोग भी उपस्थित रहे| पीथमपुर की प्रतिभा सिंटेक्स व अन्य कंपनियों सहित आयनोक्स के श्रमिक भी पहुँचे। उन्होंने सेंचुरी के सत्याग्रह का तथा श्रमिकों से एक रुपए में मिल्स चलाकर रोजगार पाने के विकल्प का पुरजोर समर्थन किया|

हिन्द मजदूर सभा के मध्य प्रदेश के अध्यक्ष हरिओम सूर्यवंशी,रामस्वरूप मंत्री, दिनेश कुशवाह और उमाकांत मिश्र ने समाजवादी समागम की ओर से श्रमिकों के संघर्ष और निर्माण के कार्य की प्रशंसा की और कहा कि यह श्रमिकों का हक है। इसमें मिल को चलाने की जिद को आज की परिस्थिति में जरुरी सत्याग्रह माना और कहा कि सेंचुरी के मज़दूर आज नहीं तो कल मप्र सरकार को झुकाएंगे, यह हमारा विश्वास है|

विष्णु प्रसाद सिंह, प्रतिभा मील, उमेश परिहार और रोशनी बहन, घरेलू कामगार यूनियन ने श्रमिक एकता से ही जीत मिलने का अनुभव और पूंजीपतियों की मनमानी को चुनौती देने की जरूरत पर बात रखी।

सेंचुरी के श्रमिकों की तरफ से संजय चौहान, सुखेन्द्र मढेया और ज्योति भदाने ने तथा कर्मचारियों की ओर से राजन तिवारी ने दो सालों का अनुभव रखा। उन्होंने कहा कि श्रमिकों की इस अहिंसक लड़ाई ने महिला, युवा, बच्चों को भी ताकत दी है। यूनियन्स के धोखा देने के बावजूद सेंचुरी के श्रमिकों ने अपनी एकजुटता बनाए रखी। इसी कारण आज तक संघर्ष चल रहा है।

नई दिल्ली से ‘न्यू ट्रेड यूनियन इनिशिएटिव्ह’ के प्रमुख गौतम मोदी ने कहा कि केंद्र शासन से 44 श्रमिक कानून बदलने से श्रमिकों के अधिकारों पर आंच आई है। लेकिन सेंचुरी का संघर्ष मज़दूरों के राष्ट्रीय संघर्ष का हिस्सा है।इसमें कूदकर हम ऑफ बढाने के लिए समर्थन और कानूनी कार्यवाही में पूरा सहयोग करेंगे।

मुंबई से भी सेंचुरी श्रमिकों के नेता अपने 20 साथियों के साथ आए। इनमें नंदू पारकर , हेमन्त गोसावी ने उनका बिरला समूह के सामने सफल लड़ाई का अनुभव रखते हुए कहा कि कुमार मंगलम ने दो सालों तक इस विवाद को निपटने के बदले जो काम किया, उसके बाद अब हम चुप नहीं बैठेंगे।

नर्मदा आंदोलन नेत्री मेधा पाटकर ने देश में रोजगार कम होने के कारण गिनाते हुए कहा कि सेंचुरी की एक नहीं, अनेक लड़ाइयों के समन्वय के साथ ही पूंजीवादी तरीके से शोषण को बदल सकेंगे ।

सेंचुरी के श्रमिकों के अहिंसक सत्याग्रही ऐलान किया कि हम आज जवाब मांगते हैं।नहीं तो हम भी संघर्ष तेज करने के लिए मजबूर होंगे।राष्ट्रीय स्तर पर श्रमिकों के कानून बदलकर हक छीनने के विरोध का प्रस्ताव भी सर्वसहमति से पारित हुआ।

Written by XT Correspondent

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