रीवा। लापरवाह और बेपरवाह तंत्र का इससे जीता-जागता उदाहरण क्या होगा कि जानवरों के लिए बनाए गए कांजी हाउस में ही लगभग 75 बेजुबान जानवरों ने भूख से दम तोड़ दिया। खास बात यह है कि इतनी बड़ी संख्या में जानवर एक-एक कर मरते रहे और प्रशासन को इसकी भनक ही नहीं लगी। जब मामला सामने आया तो प्रशासन के होश उड़ गए। आनन-फानन में अधिकारी मौके पर पहुंचे। मामले को लेकर कमिश्नर ने जांच कमेटी गठित कर जांच कराने का निर्देश दिया है।
प्रशासन की लापरवाही का यह दर्दनाक मामला है रीवा जिले के त्योंथर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम बसहट का। यहाँ ग्राम पंचायत के अंदर कांजी हाउस बनाया गया है। कांजी हाउस में आवारा मवेशियों को रखा जाता है। प्रशासन ने आवारा मवेशियों को रखने के लिए कांजी हाउस तो बना दिया लेकिन उनके लिए दाने-पानी की कोई व्यवस्था नहीं की। नतीजन एक-एक कर बेजुबान जानवर मरते रहे और प्रशासन बेखबर सोता रहा। हैरानी की बात तो यह है कि कई दिनों से किसी ने भी कांजी हाऊस की ओर झांका भी नहीं है।
जब स्थानीय रहवासियों ने इसकी जानकारी प्रशासन को दी तो प्रशासन के होश उड़ गए। आनन-फानन में पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी सहित पशु चिकित्सक मौके पर पहुंच गए। जब अंदर का नजारा देखा तो अधिकारियों और लोगों के रोंगटे खड़े हो गए। अंदर करीब 75 बेजुबान जानवर भूख से दम तोड़ चुके थे। प्रशासनिक टीम ने कांजी हाउस से मृत मवेशियों को बाहर निकलवाया वहीँ बीमार मवेशियों के लिए पशु चिकित्सकों की टीम बुलाई गई। मृत मवेशियों को बाहर निकालने के लिए प्रशासन को काफी मशक्कत करना पड़ी क्यों कि दो-तीन से हो रही बारिश के कारण कांजी हाऊस पूरी तरह से दलदल बन गया था।
इस घटना के सामने आने के बाद पंचायत की व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। इस कांजी हाऊस के संचालन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत पर थी लेकिन पंचायत द्वारा इनके भूंसा व चारा की व्यवस्था नहीं की गई। पंचायत की लापरवाही बेजुबान जानवरों की मौत का कारण बनी। बरहाल कमिश्नर डॉ। अशोक भार्गव ने मामले को लेकर जाँच कमेटी का गठन किया है। वहीँ कलेक्टर ने भी अपर कलेक्टर इला तिवारी को मौके पर भेजकर कार्रवाई का निर्देश दिया है।
