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मध्य प्रदेश के कटनी की चर्चित महिला डीएसपी नेहा पच्चीसया पर करोड़ों रूपए की ज़मीन के मामले में खेल करने की एफ़आइआर दर्ज होने के बाद सरकार ने डीएसपी नेहा पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री ने डीएसपी को तत्काल सस्पेंड करने के आदेश दे दिए हैं। जबकि कटनी पुलिस ने डीएसपी का ऑफिस सील कर दिया है।
डीएसपी नेहा पच्चीसया शुरू से विवादित रही हैं। उन पर इससे पहले भी एक ट्रांसपोर्ट संचालक से अवैध वसूली करने का आरोप लग चुका है। इसी तरह हत्या के आरोपी से साँठ गाँठ करने का आरोप भी लग चुका है। वर्तमान में जिस करोड़ो की ज़मीन के मामले में डीएसपी डीएसपी नेहा पच्चीसया पर एफ़आइआर दर्ज हुई है वह मामला विस्तार से समझिए
मामला कटनी (मध्य प्रदेश) का है नगर पुलिस अधीक्षक (CSP/DSP) नेहा पच्चीसिया और एक जमीन तथा वसूली विवाद से जुड़ा है, जिसकी जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच महिला आईपीएस एडिशनल एसपी अनु बेनीवाल ने की है। जिसके आधार पर नेहा समेत दो लोगों पर एफ़आइआर दर्ज हुई है।
शिकायत की जांच के बाद एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए, जिसमें CSP नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज, बारापत्रे और मारुफ अहमद हनफी के नाम शामिल हैं।जमीन और वित्तीय गड़बड़ी: आरोप है कि 82.86 लाख रुपये की गाइडलाइन वैल्यू वाली जमीन की रजिस्ट्री सिर्फ 18.20 लाख रुपये में की गई। रजिस्ट्री के दिन मारुफ के खाते में 15 लाख रुपये आए, जिसमें से 10 लाख और 5 लाख रुपये क्षितिज से जुड़े खातों से आए थे।
कटनी सीएसपी नेहा पचीसिया, क्षितिज राज बारापात्रेऔर मारुफ अहमद हनफी।आरोप: आपराधिक साजिश, कानून की अवज्ञा, जबरन वसूली और धोखाधड़ी के लिए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। एफ़आइआर पीड़ित आकाश लोधी की शिकायत पर आधारित, जिसमें उन्होंने जमीन के लेन-देन के संबंध में दबाव डालने और एक आपराधिक मामले से जुड़े जबरन सौदों का आरोप लगाया है।

सरकारी गाड़ी से ले गई सीएसपी रजिस्ट्री कराने
पुलिस जांच में बैंक ट्रांजेक्शन तक पहुंची इसकी शुरुआत आकाश उर्फ रमेश लोधी की शिकायत से हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उसके पिता रमेश लोधी पर दबाव बनाकर ग्राम कन्हवारा की जमीन की रजिस्ट्री 15 अप्रैल 2026 को मारूफ अहमद हनफी के नाम कराई गई। शिकायतकर्ता का दावा था कि जमीन का सौदा 1.07 करोड़ में तय हुआ था, लेकिन उसके पिता को केवल 15 लाख रूपये का चेक मिला। बाकी 92 लाख रुपए नहीं दिए गए।शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि CSP ने रमेश लोधी को अपने घर पर दो दिन रखा और सरकारी वाहन से रजिस्ट्री कार्यालय ले जाया गया।
यह है ज़मीन का खेल
82 लाख की जमीन 18.20 लाख में बिकीजांच रिपोर्ट में जमीन की रजिस्ट्री और सरकारी गाइडलाइन मूल्य का मिलान किया गया। रिपोर्ट के अनुसार रमेश लोधी की खसरा नंबर 2618/1 की जमीन का गाइडलाइन मूल्य 82 लाख 86 हजार 930 रू. था। इसके बावजूद रजिस्ट्री में जमीन का मूल्य 18 लाख 20 हजार रू. बताया गया। इसमें 15 लाख चेक और 3.20 लाख नकद दिए जाने का उल्लेख मिला। जांच रिपोर्ट ने इस अंतर को मामले का महत्वपूर्ण तथ्य माना। रिपोर्ट के मुताबिक जमीन की वास्तविक कीमत और रजिस्ट्री में दर्ज रकम के बीच बड़ा अंतर सामने आया।
15 लाख रूपए खाते में कहां से आए
रजिस्ट्री वाले दिन 15 लाख कहां से आएजांच में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी जमीन के खरीदार मारूफ अहमद हनफी के बैंक खाते से सामने आई। पुलिस ने बैंक स्टेटमेंट की जांच की तो 15 अप्रैल 2026 को मारूफ के खाते में 15 लाख रू. जमा हुए। इसमें 10 लाख रू. शाइन पार्टनर्स के खाते से और 5 लाख रू. क्षितिज राज बारापात्रे के खाते से आए थे। जांच में शाइन पार्टनर्स का बैंक खाता भी क्षितिज राज बारापात्रे से जुड़ा पाया गया। दोनों खातों में एक ही PAN दर्ज होने की बात रिपोर्ट में सामने आई है। पुलिस ने इन्हीं बैंक ट्रांजेक्शन को जमीन सौदे की कड़ी से जोड़कर देखा।खरीदार के खाते में पर्याप्त नहीं थी रकमजांच रिपोर्ट के अनुसार मारूफ अहमद हनफी के खाते में जमीन खरीदने से पहले पर्याप्त रकम नहीं थी। रिपोर्ट में उसके बैंक खाते की एक साल की जानकारी का हवाला देते हुए बताया गया कि 11 जुलाई 2025 को खाते में सिर्फ 3,036 रू. थे।
कि जमीन खरीदने के लिए आवश्यक रकम उसके पास पहले से मौजूद नहीं थी। इसके बजाय रजिस्ट्री के दिन ही 15 लाख रू. दूसरे खातों से उसके खाते में आए। इसी आधार पर जांच रिपोर्ट में क्षितिज राज बारापात्रे की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।
जांच रिपोर्ट में महिला सीएसपी की भूमिका संदिग्ध
जांच रिपोर्ट में सीएसपी की भूमिका संदिग्ध पाई गईजांच रिपोर्ट में कहा गया है कि क्षितिज बरपात्रे को सीएसपी नेहा पचीसिया का रिश्तेदार या सहयोगी बताया गया है, और यह सामने आया है कि उनके पैसे का निवेश जमीन खरीदने में किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, हत्या के मामले में आरोपी रमेश लोधी की जमीन उसी दौरान बेची गई थी जब उसके खिलाफ आपराधिक जांच चल रही थी।जांच अधिकारी ने आरोप लगाया कि रमेश पर जमीन कम कीमत पर खरीदने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए दबाव डाला गया था, और नेहा पचीसिया, क्षितिज राज बरपात्रे और मारूफ अहमद हनफी के बीच मिलीभगत की संभावना पाई गई। इसी आधार पर पुलिस ने तीनों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया। हालांकि, एफआईआर और जांच रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों पर अंतिम न्यायिक फैसला अभी आना बाकी है।
सतर्कता शाखा को हुई शिकायत, फिर महिला आईपीएस को सौंपी जांच
भोपाल से जबलपुर शिकायत, हुई जांचशिकायत पहले सतर्कता शाखा भोपाल के माध्यम से जबलपुर जोन भेजी गई। इसके बाद ADGP/IGP जबलपुर जोन ने मामले की जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनु बेनीवाल को सौंपी। अनु बेनीवाल ने दस्तावेजों, बैंक खातों और संबंधित तथ्यों की जांच कर रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी।18 अगस्त 2026 को जबलपुर जोन कार्यालय से कटनी पुलिस अधीक्षक को आपराधिक प्रकरण दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसके बाद कटनी पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर कुठला थाने में FIR दर्ज की गई। इस तरह शिकायत से शुरू हुआ मामला अब औपचारिक आपराधिक जांच में पहुंच गया है।
