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पुलिस ने 11 बलात्कार और छेड़छाड़ के मामले दर्ज कराने वाली महिला को रंगदारी व ब्लैकमेलिंग के आरोप में किया गिरफ्तार।
महिला से पूछताछ में उसके कई आपराधिक मामलों का खुलासा होने की संभावना है।
कोलकाता पुलिस ने रंगदारी वसूली और गंभीर ब्लैकमेलिंग के आरोपों में रागेश्री गोप (Ragesree Gope) नाम की एक महिला को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, इस महिला ने पिछले 4 वर्षों में शहर के विभिन्न थानों में बलात्कार और छेड़छाड़ के कई मामले दर्ज कराए थे। अब उसके खिलाफ रंगदारी वसूली के दो मामले दर्ज किए गए हैं। उसने गोल्फ ग्रीन, सर्वे पार्क, रीजेंट पार्क, जादवपुर, रवींद्र सरोवर और कसबा पुलिस थानों में BNS और IPC की विभिन्न धाराओं के तहत कुल 11 FIR दर्ज कराई थीं।
उसने केवल एक साल के भीतर अलग-अलग लोगों पर 4 से अधिक बलात्कार के मामले दर्ज कराए थे।
डॉक्टर की शिकायत: इस साल अप्रैल में शहर के एक डॉक्टर ने महिला के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। डॉक्टर ने आरोप लगाया कि महिला ने मौखिक, लिखित या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से डरा-धमकाकर शरीर, प्रतिष्ठा या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, रंगदारी मांगने और संगीन अपराधों के झूठे आरोपों में फंसाने की धमकी दी। कोर्ट (ACGM court) के आदेश पर 26 अप्रैल को पंचशायर पुलिस स्टेशन में रागेश्री गोप के खिलाफ BNS की धारा 308(7) और 351(2) के तहत FIR दर्ज की गई थी।
जिम कर्मचारी की शिकायत: 28 मई 2026 को एक जिम कर्मचारी ने सर्वे पार्क पुलिस स्टेशन में महिला के खिलाफ BNS की धारा 79/115(2), 308(3), और 351(2) के तहत मामला दर्ज कराया, जिसमें मारपीट, रंगदारी, झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी और आपराधिक साजिश के आरोप शामिल थे।
कुछ दिन पहले, एकम् न्याय फाउंडेशन (Ekam Nyaay Foundation) नामक एनजीओ ने पश्चिम बंगाल के डीजीपी और कोलकाता के पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर इस मामले में एक एसआईटी (SIT) गठित करने और महिला द्वारा दर्ज कराए गए सभी मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
पुलिस ने 19 सितंबर 2026 को रागेश्री गोप को गिरफ्तार कर लिया और अदालत ने उसे 13 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
एकम् न्याय फाउंडेशन की निदेशक दीपिका नारायण भारद्वाज का बयान:
मुझे दो महीने पहले रागेश्री गोप के पीड़ितों ने संपर्क किया था। हमने सभी विवरण जुटाए, उसके द्वारा दर्ज कराई गई समान FIR की जांच की और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया। हमने डीजीपी पश्चिम बंगाल और सीपी कोलकाता को एसआईटी के गठन के लिए पत्र लिखा। आखिरकार, उसके खिलाफ दर्ज FIR के महीनों बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। यह एक अच्छी कार्रवाई है, लेकिन मुझे जानकारी मिली है कि उसने कोलकाता भर में और भी कई मामले दर्ज कराए हैं। एक एसआईटी इसके अन्य मामलों और उसके सहयोगियों का पर्दाफाश कर सकती है। इसी तरह हमने गुड़गांव, जबलपुर और जयपुर में भी ऐसी महिलाओं को गिरफ्तार करवाया है जिन्होंने जबरन वसूली के लिए 7 से 13 तक बलात्कार के मुकदमे दर्ज कराए थे। मैं ऐसे सिलसिलेवार ब्लैकमेलरों के पीड़ितों से अनुरोध करती हूं कि वे चुप न रहें और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से संपर्क करें। मैं कोलकाता पुलिस के डीसी डीडी की शैलजा मैम और स्पर्शा मैम का आभार व्यक्त करती हूं जिन्होंने इस मामले में त्वरित कार्रवाई की।”
