बड़वानी। महात्मा गांधी का स्मारक भी सरदार सरोवर बांध से प्रभावित होकर कुकरा से स्थानांतरित कर कर दिया गया है लेकिन सालों से जो आस्था राजघाट से जुडी थी अब वहां औपचारिकताएं ही अब शेष हैं। एकलरा में बापू का स्मारक भले ही कुकरा से कहीं ज्यादा अच्छा बना दिया गया हो मगर वह वीरान है। यदा कदा खास मौकों पर ही साफ-सफाई कर औपचारिकताएं निभाई जा रही है। बडवानी के राजघाट पर बिरोज बाई ने सालों यहां रहकर नियमित साफ-सफाई की थी मगर अफसोस अब ना बिरोज बाई है और ना ही राजघाट का वो स्मारक।
नर्मदा के किनारे कुकरा में था राजघाट
राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी यानी कि बापू की 150वीं जयंती 2 अक्टूबर 2019 को पूरा देश मनाने जा रहा है, लेकिन बड़वानी का कुकरा राजघाट स्मारक की यादें महात्मा गांधी से जुड़ी हुई है। देश की राजधानी दिल्ली में बने स्मारक की तरह ही बड़वानी जिला मुख्यालय पर नर्मदा नदी के किनारे राजघाट पर ग्राम कुकरा में दूसरा स्मारक था। स्मारक की स्थापना में गांधीजी के सहयोगी रहे और मध्य भारत के पहले शिक्षा मंत्री काशीनाथ त्रिवेदी की मुख्य भूमिका रही। स्मारक का संकल्प 12 फरवरी 1964 को लिया गया इसके बाद निर्माण कार्य का श्रीगणेश 14 जनवरी 1965 को हुआ। स्मारक का उद्घाटन 12 फरवरी 1965 को हुआ। यंग इंडिया किताब में लिया गया एक अंश ‘हे राम’ यहां अंकित है। गांधी जी की याद में बनाए गए इस स्मारक से आज भी कई लोगों की यादें जुड़ी हैं।
स्मारक हटाने का हुआ था विरोध
सरदार सरोवर बांध के पानी के कारण राजघाट कुकरा पानी के डूब क्षेत्र में आने के बाद 27 जुलाई 2017 को इस गांधी स्मारक को राजघाट से हटाकर नई पुनर्वास स्थल एकलरा पर स्थापित करने के फैसले का संपूर्ण निमाड़ और प्रदेश भर में विरोध हुआ था लेकिन बाद में ऐसे एकलरा में स्थापित किया गया।
12 फरवरी को लगता है सर्वोदय मेला
गांधीजी की याद में बनाए गए इस स्मारक पर हर साल 12 फरवरी को सर्वोदय मेला लगता है। इसमें गांधी जी के विचारों को आत्मसात करने के लिए बड़ी संख्या में गांधीवादी लोग एकत्रित होते है। इस सर्वोदय मेले को प्रारंभ करने में गांधीजी के सहयोगी रहे और मध्य भारत के पहले शिक्षा मंत्री काशीनाथ त्रिवेदी विशेष की विशेष भूमिका रही। गांधीजी जी की याद में उनकी पुण्यतिथि से 30 जनवरी से काशीनाथ त्रिवेदी जी के द्वारा स्थापित गांधी आश्रम ग्राम भारती आश्रम टवलाई जिला धार से पदयात्रा प्रारंभ होती थी और विभिन्न ग्रामों से होते हुए 11 फरवरी को राजघाट पहुंचती थी, इसके बाद 12 फरवरी को गांधी जी के श्राद्ध दिवस के रूप में सर्वोदय मेला मनाया जाता है। यह पदयात्रा आज भी जारी है।
बिरोज बाई की यादें इस स्मारक से जुड़ी हुई हैं
गांधीजी का स्मारक जब राजघाट कुकरा पर था तो वहां पर रहने वाली बिरोज बाई की यादें आज भी स्मारक से जुड़ी हुई हैं। वह स्मारक की नियमित सफाई करती थी। बिरोज बाई पारिश्रमिक के रूप में कुछ नहीं लेती थी। गांधी विचारक जो भी श्रद्धा के रूप में उन्हें दे देते थे वह ले लेती थी। इस तरह से बिरोज बाई को भी आज भी यहां के लोग बड़े सम्मान से याद करते हैं। लेकिन डूब क्षेत्र में स्मारक के आने के बाद अब उनकी यादें ही शेष है।
अब केवल औपचारिकता
गांधी स्मारक राजघाट ग्राम कुकरा डूब क्षेत्र में आने के बाद नए स्थल एकलरा पर 30 जनवरी और 2 अक्टूबर को यदा-कदा लोग ही स्मारक पर चले जाते हैं। पहले स्मारक राजघाट पर होने के कारण अनायास ही लोग दर्शन कर लेते थे लेकिन अब औपचारिकताएं शेष है। अब 2 अक्टूबर आने वाली है इन्ही औपचारिकताओं के बीच नगर पालिका यहां साफ सफाई करवा देगी और यहां पौधारोपण हो जाएगा।
