बैतूल। देश भर में इस समय नवरात्री की धूम है। श्रद्धालु माता के मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना कर रहे हैं। देश में माता के कई ऐतिहासिक और प्राचीन धार्मिक स्थल हैं। इन्ही स्थलों में से एक है बैतूल में स्थित माँ रेणुका का मंदिर।
यह प्रसिद्ध धार्मिक स्थल बैतूल जिले के आमला से 10 किमी दूर छावल गांव में स्थित है। छावल गांव में होने के कारण माता का यह धार्मिक स्थल छावल धाम के नाम से जाना जाता है। आदि शक्ति मां भगवती का यह अनोखा धार्मिक स्थल करीब 450 साल पुराना है। छोटी सी पहाड़ी पर बने मंदिर में माँ रेणुका की प्राकट्य प्रतिमा स्थापित है।
मान्यता है कि मंदिर में स्थापित माता की प्रतिमा एक दिन में तीन बार अपना रूप बदलती है। माँ रेणुका की प्रतिमा सुबह से लेकर शाम होने तक तीन रूप में नजर आती है। प्रतिमा में सुबह नन्ही बालिका का स्वरूप दिखता है तो दोपहर को माँ के चेहरे का तेज बढ़ जाता है। शाम को माँ रेणुका ममतामयी सौम्य करुणा में रूप में नजर आने लगती है।
कथाओं के अनुसार पहाड़ी पर बना यह मंदिर लगभग 450 साल पुराना है। मंदिर में स्थापित माँ रेणुका की प्रतिमा यहीं प्रकट हुई थी। मंदिर के प्रारंभ से लेकर अब तक गोस्वामी परिवार ही यहाँ पूजा करता चला आ रहा है। गोस्वामी परिवार की ये पांचवी पीढ़ी है। परिवार के सदस्य मंदिर के साथ-साथ देखरेख का भी काम करते हैं।
मंदिर में अखण्ड ज्योति प्रज्वलित है। कहा जाता है कि अखण्ड ज्योति पिछले 60 सालों से प्रज्वलित है। ग्रामीण सहित बाहर से आने वाले श्रद्धालु माँ रेणुका की कृपा के गवाह है। माता के दर्शन करने के लिए नवरात्र में दूर दूर से श्रद्धालु आते हैं। छावल गांव के अलावा माँ रेणुका महाराष्ट्र के माहुरगढ़, भैसदेही के धामनगांव, बिसनोर और मासोद में विराजमान है।
माता के दरबार में जो भी विवाहित स्त्री संतान प्राप्ति के लिए मन्नत मांगती है। उसकी मन्नत माता रानी जरूर पूरी करती है। भक्तों का विश्वास हैं कि माँ के दरबार में वर्षों से जल रही अखण्ड ज्योति का तेल शरीर पर लगाने से कैंसर तक ठीक हो जाता है। मन्दिर आकर कैंसर के मरीज ठीक हो जाते हैं। माँ के चमत्कार को देखकर यहाँ साल भर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। कहते है कि जिस पर माता रानी की कृपा होती है। वही यहा आकर माँ के दर्शन कर पाता है।
