May 4, 2026

मालवा के गाँवों में ज्योत जलाकर पुरुषों के गरबा करने की रीत

आष्टा,द टेलीप्रिंटर। जहाँ पूरे देश में नवरात्रि के दौरान ही माता की आराधना की जाती है, वहीं मालवा के कई गाँवों में नवरात्रि खत्म होने के बाद पुरुष गरबा करते हुए पाँच दिनों तक परिवार की बहन-बेटी की तरह आराधना करते हैं। मिटटी के कलशों का बेड़ा बनाकर उस पर एक दीपक में लौ जलाई जाती है और गाँव के पुरुष आसपास घूमते हुए मालवी बोली में गरबे गाते हैं। आष्टा में पाँचवे दिन हाथी के हौदे से बिदाई दी जाती है।

मालवा में लोक रीतियों और लोक परंपराओं की कड़ी में शारदेय नवरात्र के बाद मालवा क्षेत्र के गांवों में रात को पांच, सात या नौ दिनों के लिए देवी के ज्वाला स्वरूप की आराधना होती है। शाम गोधूलि बेला से मध्यरात्रि रात गरबा, रामलीला, नृत्य, पारम्परिक गीत आदि का आयोजन किया जाता है।

आष्टा में भी दशहरे से ज्योति ज्वाला की स्थापना की जाती है। गंज स्थित राम मंदिर, बुधवारा स्थित राम मंदिर, बड़ा बाज़ार स्थित गणेश मंदिर और अलीपुर स्थित माता के मंदिर में “ज्वाला देवी स्वरूप में अर्चन किया जा रहा है। नगर में ये परम्परा तकरीबन ढाई सौ या तीन सौ साल पुरानी (नवाब कालीन) बताई जाती है।

मान्यता है कि इन सात दिनों में माई को हर कोई अपनी “बहन – बेटी” की तरह आदर देता है। उनके अर्चन में पारम्परिक भजनों को ही गया जाता है और गरबा (छोटी बच्चियों द्वारा) किया जाता है। विसर्जन के दिन विशेष रूप से “हाथी” विसर्जन जुलूस में रहता है। कहते हैं कि यह अम्बे महारानी का वाहन है, गंज स्थित श्रीराम मंदिर में विसर्जन जुलूस में कृत्रिम हाथी आकर्षण का केंद्र रहता है।

मालवी बोली के ये भजन यक़ीनन कबीर, रहीम, मीरा, रसखान, सूर और तुलसी दासजी की याद अनायास दिलाते हैं। इन भजनों में भाव है। इनके लिए किसी विशेष साजो – समान के इंतजाम की भी ज़रूरत नहीं होती।

बड़ी बात यह है कि माई का अर्चन सिर्फ और सिर्फ “भाव” से किया जाता है। पहले दिन माई के लिए “अम्बे रमे जगदम्बे रमे, आज म्हारी मैया गरबो रमे” और अंतिम दिन “आज अम्बे तमे सूमरा री माय” “तम तो तमारा घरे चल्याजी म्हारी राम राम छे”…जैसे भावपूर्ण भजनों से मां से संवाद किया जाता है।

कहते हैं कि अम्बे महारानी से मन्नत मांगने कई दूर से लोग आते हैं। मुराद पूरी होने पर अपना संकल्प पूरा करते हैं। यही कारण भी है कि अम्बे महारानी को “संकट हरनी” कहा गया है। भाव से हर कोई हर दिन यही शब्द गुनगुनाता है “अम्बे जी पधारो मेरी मात सदा तू संकट हरनी”।

Written by XT Correspondent

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