सागर। ग्लोबल हंगर इंडेक्स (जीएचआई) 2019 में भारत को 117 देशों की रैंकिंग में 102वां स्थान मिला है। भुखमरी के मामले में भारत की स्थिति पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से भी ख़राब है। इसी सच्चाई को उजागर करती तस्वीरें सामने आई हैं। जिसमें एक आदिवासी अपने बेटे के साथ श्मशान में रहने को मजबूर है। इन्हें ना किसी सरकारी योजनाओं का लाभ मिला है और ना ही ग्राम पंचायत से किसी प्रकार का सहयोग। पिता-पुत्र को दो वक़्त का खाना भी नसीब नहीं होता है।
शमर्सार कर देने वाला यह मामला सागर जिला मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर दूर ग्राम कुडारी का है। यहाँ रहने वाला आदिवासी राम रतन का मकान बारिश के कारण गिर गया। मकान गिरने के बाद राम रतन के पास रहने के लिए कोई जगह नहीं बची तो मज़बूरी में उसे अपने 9 साल के मासूम बच्चे हनुमत सहित श्मशान में शरण लेनी पड़ी।
पिता-पुत्र दोनों रात में श्मशान में ही सोते हैं। दिन में भी जब कोई काम नहीं होता है तो आराम करने शमशान में ही चले जाते हैं। हालत इतने बद से बदतर है कि कभी-कभी इस परिवार के दोनों सदस्यों को भूखे पेट ही सोना पड़ता है। कई बार पड़ोसी इनकी मदद करके खाना मुहैया कराते हैं। शर्मनाक बात तो यह है कि इस मजबूर परिवार को न सरकार की योजनाओं का लाभ मिला है और न ही ग्राम पंचायत से किसी प्रकार का सहयोग। यह जैसे तैसे अपना जीवन यापन कर रहे हैं।
राम रतन की पत्नी का करीब 7 वर्ष पहले प्रसूति के दौरान स्वर्गवास हो गया था। उसकी मौत के बाद भी इसे किसी प्रकार की आर्थिक सहायता प्राप्त नहीं हुई। रामरतन ने मकान गिरने के बाद ग्राम के सरपंच को इस संबंध में सूचित किया था लेकिन उसे किसी प्रकार की मदद नहीं मिली। रामरतन का मासूम बच्चा स्कूल भी पढ़ने नहीं जाता है।
इस मामले में जब प्रशासन के अधिकारियों से उनका पक्ष जानना चाहा तो उनका कहना है कि उन्होंने इस मामले की तत्काल सूचना संबंधित जनपद के सीईओ को दे दी है। उन्हें निर्देशित किया है कि तत्काल इस मामले में पीड़ित परिवार को सहायता पहुंचाएं। साथ ही इस मामले में जो भी दोषी व्यक्तियों है उन पर कार्रवाई होना है।
